वीर्यनाश से होने वाले शारीरिक असर

1 . शारीरिक असर

आयु का नाश, स्वास्थ्य का नाश, बल का नाश।

दीर्घायुः त्रयः उपस्तम्भाः।

आहारः स्वप्नो ब्रह्मचर्यं च सति । – चरक संहिता

अर्थात् दीर्घायु के तीन उपस्तम्भ हैं – आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य।

समस्त आयुर्वेद शास्त्र इस बात को लेकर अटल है कि,

मनुष्य की आयु शरीर में संचित प्राण शक्ति से बढ़ती है।

उसकी प्राण शक्ति वीर्य की वृद्धि से बढ़ती है।

और वीर्य की वृद्धि सात्त्विक आहार निन्द्रा से होती है।

राजसिक – तामसिक आहार निन्द्रा पाने वाले व्यक्ति का वीर्यपात जाने अनजाने में होता ही रहता है, फिर वो कितना भी रोकने का प्रयास कर ले।

राजसिक वृत्तियाँ : अधिक मात्रा में आहार लेना, अत्यधिक गर्म, तीखा, नमकीन, उत्तेजक, तला हुआ आहार लेना और देर रात तक जगना आदि हैं।

तामसिक वृत्तियाँ : बासी, ठंडा भोजन, प्याज़, लहसुन, मांस, धूम्रपान, मदिरा आदि का सेवन करना और ज़रूरत से ज़्यादा सोते रहना आदि हैं।

जब तक आप इन राजसिक व तामसिक वृत्तियों में प्रवृत्त रहेंगे तब तक वीर्य का नाश होगा ही। और यदि आप अभी भी नहीं समझे कि हस्तमैथुन आदि कुचेष्टाओं से शरीर से वीर्य निकल जाने पर शरीर की क्या हालत होती है? तो आइए एक और उदाहरण से समझते है।

आपने गन्ने के डंडे को देखा है?

वह कितना मज़बूत और ताक़तवर होता है? इतना की उसके प्रहार से किसी की हड्डियाँ भी तोड़ी जा सकती हैं।

अब उसी गन्ने के डंडे का मंथन कर दो। अर्थात् उसको निचोड़ कर उसमे से सारा रस निकाल दो।

अब जो गन्ने के कुलचे बचे, उससे किसी पर प्रहार करने का प्रयास करो।

हड्डियाँ क्या?

एक मटका भी नहीं टूटेगा उससे। यही हाल होता है हमारे शरीर का; जब हम हस्तमैथुन आदि से उसका मंथन करके उसके समस्त कोषों में से वीर्य को निचोड़कर निकाल देते हैं।

जिस प्रकार गन्ने में रस है उसी प्रकार शरीर में वीर्य होता है। वो निकल जाने पर पुरुष एक चलता फिरता मृतदेह बनकर रह जाता है।

हमारे शरीर में ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ वीर्य विद्यमान नहीं है।

जब वीर्य निकलता है तो हर जगह से ऊर्जा और शक्ति निकल जाती है।

ऐसा मत समझिए की वीर्य नाश से सिर्फ़ आँख की रोशनी जाएगी, या शरीर के किसी एक दो अंग पर असर पड़ेगा।

वीर्यनाश से पूरे शरीर के प्रत्येक अंग पर असर पड़ता है।

क्यूँकि वीर्य शरीर के एक एक कोष में होता है। तभी इस का एक एक शुक्राणु (स्पर्म) पूरा का पूरा मनुष्य बनाता है, न कि मात्र कुछ अंग।

इसीलिए चाहे कितना बड़ा मर्द क्यों न हो, वीर्य स्खलित होने के पश्चात वो निर्बल हो ही जाता है। उसके पश्चात योग छोड़ो वो भोग भी नहीं कर सकता।

क्योंकि भोग के लिए भी शरीर में शक्ति और अंगों में बल चाहिए होता है। और जब कोई हस्तमैथुन की आदत लगा देता है तो उसके जननांग की संवेदनशीलता पर भारी असर पड़ता है।

फिर जब विवाह के पश्चात सच में पुत्र प्राप्ति के लिए सहवास करना होता है तो स्त्री का जननांग भी उसे उत्तेजित नहीं कर पाता है। क्योंकि लंबे समय तक हाथ से मसले जाने से या तो वह असंवेदनशील (Desensitised) हो जाता है या तो अतिसंवेदनशील (Hyper Sensitive) हो जाता है।

जिसके परिणाम स्वरूप फिर वो स्तंभन दोष (Erectile Dysfunction) से पीड़ित होने लगता है। जिससे फिर चाहने पर भी वो भोग नहीं कर सकता।

और यदि आपको मॉडर्न विज्ञान से इनके प्रमाण चाहिए तो वो भी दे देते है।

1. हस्तमैथुन करने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर 48-59% तक कम हो जाता है – PUBMED, 2003 & 2018

2. वीर्य स्खलन से शरीर में टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन के लिए आवश्यक जिंक, मैग्नीशियम, कैल्शियम और विटामिन सी और अन्य विटामिनों की कमी हो जाती है। – PUBMED 2018, WILEY 2013

3. हस्तमैथुन से शरीर में प्रोलैक्टिन और एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है। PUBMED, 2019

4. प्रोलैक्टिन एक हार्मोन है। जो आपको हमेशा थका हुआ और आलसी महसूस कराता है, आपकी प्रजनन शक्ति को घटाता है और आलस्य बढ़ाकर पेट के आसपास की चर्बी बढ़ाता है – PUBMED, 2020, Dr. Andrew Huberman 2021

5. उच्च प्रोलैक्टिन स्तर स्तंभन दोष (Erectile Dysfunction) और बांझपन (Infertility) बढ़ाता है – PATIENT, 2017

6. हस्तमैथुन एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ाकर टेस्टोस्टेरोन को कम करता है, शरीर में मोटापा बढ़ाता है, और आपको अधिक स्त्रैण (Feminine), असंयमी और भावनात्मक बनाता है – PUBMED 2020, HEALTHLINE 2019

7. हस्तमैथुन हड्डियों और मांसपेशियों (Muscles) का घनत्व (Density) कम करता है – PUBMED, 2021

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