वीर्यनाश से होने वाले सामाजिक एवं व्यावहारिक असर

3. व्यावहारिक – सामाजिक असर

कभी एक सांड को देखा है?

बड़ा सा, अत्यंत ही शक्तिशाली और यदि कोई परेशान करे तो तुरंत ही आक्रमण करके उसको ज़मीन पर रगड़ दे। उन्हीं का उपयोग होता है जाली कट्टू और बुलफ़ाइट जैसी साहसी लड़ाइयों में। और उन्हीं का उपयोग होता है गायों से स्वस्थ बछड़ों का जन्म करवाने के लिए।

सांड कभी अपना दमन सहन नहीं करता। उससे यदि काम करवाना है तो भी उसके स्वभाव के अनुसार करवाना होगा। उसके स्वभाव और भावना के विरुद्ध आप उससे काम भी नहीं करवा सकते।

अभी एक बैल को देखा है?

सांड से छोटा, सांड से पतला, सांड से काफ़ी कम ताकतवर और सांड से काफ़ी अधिक पालतू। उनका उपयोग होता है अधिकतर खेत जोतने के लिए और भारवहन के लिए।

उनका उपयोग कभी गायों को गर्भवती करने के लिए नहीं किया जाता। यदि खरीदने भी जाओ तो बैल के सामने सांड का मूल्य काफ़ी अधिक होता है।

वैसे ही, अश्वों (घोड़ों) में भी दो प्रकार के अश्व होते है। एक होता है बीजाश्व (Stallion) और दूसरा बधिया (Gelding) अश्व।

बिजाश्व बढ़िया अश्व से क़द में बड़े, ताकतवर और आक्रामक अश्व होते हैं। उन्हें नियंत्रित करना अत्यंत ही कठिन होता है। अतः मात्र बड़े बड़े घुड़सवार और योद्धा ही इन्हें पालते हैं।

तदुपरांत मादा अश्वों को गर्भवती के लिए भी बिजाश्व का ही उपयोग होता है।

परंतु क्यों?

सांड और बैल,

बीजाश्व और बधिया अश्व,

दोनों ही यदि एक ही योनि के हैं।

एक ही (पुरुष) लिंग के हैं।

तो दोनों में इतना भेद क्यों?

क्यों एक नौकर की तरह और एक राजा की तरह रहता है?

दोनों में आख़िर भेद क्या है?

भेद है!

दोनों भले ही एक ही योनि के हों,

दोनों भले ही एक ही माता पिता से जन्म लिए हों,

और दोनों भले ही एक (पुरुष) लिंग के हों।

परंतु एक की रगों में वो चीज़ दौड़ रही है, जो दूसरे की रगों में नहीं दौड़ रही।

वो है,

वीर्य।

जी हाँ !

बछड़ा जन्म लेता है उसके पश्चात यदि उसे प्राकृतिक रूप से बढ़ने दिया जाता है तो वो बड़ा होकर विशाल, ताकतवर सांड बनता है।

परंतु यदि उसके अंडकोषों (Testicles) को काटकर उसका बंध्याकरण (Castration) कर दिया जाता है, तो उसके शरीर में वीर्य बनना बंद हो जाता है और वो वीर्यहीन, कम ताक़त वाला, सरलता से नियंत्रण में रखा जा सके ऐसा पालतू बैल बन जाता है।

वैसे ही,

अश्व के जन्म के कुछ समय बाद भी यदि उसे प्राकृतिक रूप से बड़ा होने दिया जाता है तो वो ताकतवर बीजाश्व बनता है। जिसको नियंत्रण करना बड़े साहस का काम होता है।

परंतु क्योंकि अधिकतर लोग यह नहीं कर पाते, इसलिए उसका भी बंध्याकरण करके उसे बधिया अश्व बना दिया जाता है। जिससे वो सरलता से पालतू बन जाता है और उसको नियंत्रण करना आसान हो जाता है।

वैसे ही, आपने देखा होगा गली में कुत्तों का भी बंध्याकरण कर दिया जाता है। जिससे वे डरपोक बन जाए और उनमें किसी को काटने की ताक़त ही न रहे।

परंतु इन सभी की तरह प्रजा का बंध्याकरण तो किया नहीं जा सकता, इसीलिए जब प्रजा में अधिक साहसी और बहादुर युवान बढ़ने लगे तो पोर्न, गंदी फ़िल्में, और ऐड्वर्टाइज़ के रूप में अभद्र चलचित्र हर गली मुहल्ले के कोने कोने और हर किसी के हाथ सरलता से उपलब्ध कर दिया जाता है।

जिससे युवा अपना वीर्य नाश करके अपने आप को वीर्यहीन, डरपोक, साहसहीन व पालतू हो जाए और उन्हें जो कुछ भी बोलें वो चुपचाप बिना किसी प्रश्न या विद्रोह के करते रहें। जिससे प्रजा कभी किसी भी भ्रष्टाचार या अधर्म का विरोध न करें और शासक अपना शासन चिंतामुक्त होकर करते रहें।

इसीलिए,

पहले के समय में जब भी कोई देश अन्य किसी प्रदेश पर आक्रमण करता था तो सबसे पहले वहाँ के सशक्त जवानों को मार देते थे और बच्चों, बूढ़ों और स्त्रियों को छोड़ देते थे। क्योंकि उन्हें पता है कि एक साहसी पुरुष भी परिस्थितियों को संपूर्ण रूप से पलटने की पूरी की पूरी शक्ति रखता है।

तदुपरांत,

जब दुश्मन की सेना अधिक ताकतवर और बड़ी होती थी तो राजा लोग नर्तकियों और वैश्याओं को रात में दुश्मन की सेनाओं के बीच में भेज देते थे। फिर दूसरे दिन वही सेना जब वीर्यहीन और पौरुषहीन हो जाती थी तो उस बड़ी सी सेना को छोटी सी सेना भी सरलता से हरा देती थी।

जब देश के क्रांतिकारी युवा अधर्मी राजा की प्रवृत्तियों का विद्रोह करना शुरू करते थे तब भी वे अधर्मी राजा उन्हीं युवाओं के आसपास वैश्यालय खुलवा देते थे। जहाँ वे युवा नर्तकियों को देख उत्तेजना से अपना वीर्य विनाश कर देते थे। जिससे फिर उनमें विद्रोह के लिए न शारीरिक बल रहता था न ही मानसिक। जिसके बाद उन्हें जो बोलो वो करने लगते थे।

आज वही वैश्यालय हर किसी के हाथ में उँगलियों के इशारे पर उपलब्ध करवाए गए हैं।

जिससे समाज के सारे पुरुष अपना वीर्य व्यय करके पौरुषहीन हो जाएं और अधर्मी सरकार और धनवान कॉर्पोरेट वाले जो भी बोले वो बिना किसी प्रश्न या विद्रोह के चुपचाप पालतू पशु की भाँति करते रहे।

क्योंकि जब पुरुष वीर्यहीन हो जाता है तो उसकी संकल्पशक्ति, न्याय परायणता, धर्म आदि सब लोप होने लगता है। जिससे अत्यंत ही सरलता से उसे अन्यायी, अधर्मी और भ्रष्टाचारी बनाया जा सकता है।

और ऐसे अन्यायी, अधर्मी और भ्रष्टाचारी लोगों को बडे लोग सरलता से धन, संपत्ति पद, प्रतिष्ठा आदि के प्रलोभन से अपनी उँगलियों पर नचा सकते हैं।

परंतु,

वीर्यवान लोग अधर्मी शासकों के लिए हमेशा संकट के समान होते हैं। क्योंकि वे स्वतंत्र होते हैं।

ऐसे वीर्यवान युवा सरकार के दिये प्रलोभनों पर नहीं जीते और धन, संपत्ति, पद, प्रतिष्ठा तो दूर की बात है, वे साम, दाम, दंड, भेद किसी से भी अपने मूल्यों, नीतिपरायणता और धर्म का त्याग नहीं करते है।

अतः ऐसे वीर्यवान लोगों के होते हुए भ्रष्टाचार, अन्याय और अधर्म नहीं किया जा सकता।

इसीलिए इस बात को समझिए कि, जितनी भी बार आप अपना वीर्य नाश करते हैं उतनी बार आप न ही मात्र अपने आप की परंतु अपने संपूर्ण समाज की अधोगति करते है।

क्योंकि आज के समय में पुरुषों को नहीं परंतु उनकी पौरुष शक्ति का हनन करके ही युद्ध जीते जा सकते हैं। इसीलिए चीन आदि देश के जितने भी टिकटॉक आदि मोबाइल ऐप हैं, उनमें वे अपने देश में मात्र अच्छी और शैक्षणिक वीडियो को प्रचलित करते है। जब कि चीन के बाहर अभद्र, अर्धनग्न, मूर्खतापूर्ण वीडियो को ही प्रचलित किया जाता है।

जिससे अपने देश के युवा प्रेरणात्मक चीज़ों को जीवन में उतारकर आगे बढ़ें और अन्य देश के युवा मूर्खतापूर्ण अभद्र चीज़ों में समय बिगाड़कर अपना पतन करें।

क्योंकि वे जानते हैं कि, भारत जैसे देश में जहां 40 करोड़ युवा हैं।

उसमें से यदि सिर्फ 1 करोड़ युवा भी अपनी शक्ति का सही उपयोग कर लेंगे तो पूरी दुनिया पर अत्यंत ही सरलता से भारत राज कर लेगा।

इसीलिए वहाँ के युवाओं को अश्लीलता में डुबा दिया जाए, जिससे वे अपना समस्त शौर्य प्रतिदिन नाली में बहाते रहें और कभी इस जाल से बाहर न निकल पाएँ।

समाज की हर स्त्री में मात्र भोग ही देखें, जिससे परिवार भी टूटते है और समाज भी।

ऐसे वीर्यहीन पुरुषों के कारण ही फेमिनिज्म का जन्म होता है। क्योंकि जब स्त्रियों के जीवन में सही वीर्यवान साहसी पुरुष नहीं होता जो अपनी ज़िम्मेदारियों का पालन करें, स्त्री का ख़्याल रखे, उनका भरण पोषण करें और उनकी रक्षा करें।

तभी उन्हें पुरुषों के काम करने पड़ते हैं। और अपने जीवन के लिए कमाई करनी पड़ती है।

और यदि आपको नहीं पता तो यह भी बता दें कि, पिछले 50 वर्षों में औसत पुरुष के वीर्य में Sperm Count 47.6% से भी कम हो गई है। इसीलिए आजकल हम देख रहे है कि हर दूसरे दंपत्ति को संतान प्राप्ति करने के लिए मेडिकल सहाय की आवश्यकता पड़ने लगी है।

न्यूयॉर्क के पब्लिक हेल्थ प्रोफेसर शाना स्वान के 2017 के रिसर्च के अनुसार 2045 तक विश्व के अधिकतर पुरुषों का Sperm count शून्य हो जाएगा। और प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्ति मानो असंभव ही हो जाएगी।

सभी को IVF आदि मेडिकल सहाय मात्र से ही संतान प्राप्ति करनी होगी।

और यह सभी तो फिर भी कुछ मुख्य मुख्य सामाजिक असर ही हैं। वीर्यनाश के यदि सभी सामाजिक असर के बारे में बताने जाएँ तो इतने सारे हैं की एक अलग से पूरा पुस्तक भर जाए।

अतः ऐसा विचार जरा भी न रखें कि आपका वीर्यनाश सिर्फ़ आप ही के लिए हानिकारक है।

समाज आप जैसे युवाओं से ही बना है। जब जब एक युवा अपने आपको वीर्यनाश आदि की आदतों से निर्बल बनाता है तब तब वो अपने समाज को भी निर्बल बना रहा होता है।

तो अपने नहीं तो अपने समाज के प्रति अपना उत्तरदायित्व जानकर अपने वीर्य की रक्षा करके एक वीर्यवान पुरुष बनें।

और यदि आप उन लोगों में से हो जिनको न ही अपनी पड़ी है और न ही अपने समाज की, तो उनके लिए आइए समझते है कि इन कृत्यों का आपके परिवार पर कितना असर पड़ता है।

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