वीर्यनाश से होने वाले आर्थिक असर

6. आर्थिक असर

वैदिक संस्कृति में लड़के के जीवन के प्रथम पच्चीस वर्ष ब्रह्मचारी के रूप में विद्या अर्जन के लिए रखे जाते हैं, जोकि आजकल नहीं रखे जाते हैं। और उसका परिणाम हम देख पा रहे हैं।

बड़े बड़े कॉलेज और विद्यालयों में से भी ऐसे युवा निकल रहे हैं जो न करियर में सफल हो रहे हैं, न समाज में, न संबंध में और न ही अध्यात्म में। ऐसा क्यों? क्योंकि मॉडर्न शिक्षण पद्धति एक सबसे मूलभूत सिद्धांत को अनदेखा कर रही है। जो ये है कि,

‘स्त्रियाँ सबसे बड़ा विकर्षण (Distraction) हैं।’

इसीलिए सनातन संस्कृति में परस्त्री और परपुरुष को कभी घुलने मिलने नहीं दिया जाता था। कितना भी सक्षम पुरुष क्यों न हो, एक बार पुरुष किसी स्त्री के विचारों में खो जाता है तो उसकी सारी क्षमताएँ, ध्यान शक्ति और संकल्प शक्ति का नाश हो जाता है। आपके आसपास ही जाने कितने सारे प्रतिभाशाली दिमाग वाले युवाओं ने अपना विद्यार्थी जीवन लड़की बाज़ी में व्यर्थ गवाँ दिया है। यह आप जानते ही होंगे।

और आज के समय में जब स्कूलों से लेकर ऑफिस आदि हर जगह स्त्रियाँ और पुरुषों को घुल मिलकर रखा जाता है ऐसे में जो संयमी होता है वही जीतता है। और जो असंयमी होता है वो स्त्रियों के विचारों, संकल्पों, चिंतन और उनको प्राप्त करने के व्यर्थ प्रयासों में ही अपनी युवावस्था और कितने सारे अवसर गवाँ देता है।

तो यदि आप जीवन में अपनी वास्तविक महत्तम क्षमता तक पहुँचना चाहते हैं तो आपका सबसे पहला संकल्प होना चाहिए अखंड ब्रह्मचर्य।

ब्रह्मचर्य बिना अपनी महत्तम क्षमता को प्राप्त करना असंभव है। इसीलिए न ही मात्र सनातन संस्कृति में परंतु समस्त पुरातन अध्यात्म आधारित धर्म संप्रदाय का प्रथम चरण ब्रह्मचर्य ही होता था। उसके बिना मार्ग की शुरुआत ही नहीं होती थी।

यदि आप विद्यार्थी नहीं भी हो, किसी कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी कर रहे हो, या फिर अपना व्यवसाय ही क्यों न चलाते हो, इन सभी स्थितियों में आपका संयम आपके करियर का सबसे महत्त्वपूर्ण निश्चय होगा।

आप स्वयं रिसर्च करोगे तो आपको पता चलेगा कि, दुनिया भर में कॉर्पोरेट में किस हद तक छल कपट से निर्दोष युवाओं का जीवन बर्बाद कर दिया जाता है। वो लोग यह कर पा रहे हैं यह दिखाता है कि लोगों में संयम नहीं है।

जो लोग ऊपर बैठे हैं वे जानते है कि, एक पुरुष की सबसे बड़ी कमजोरी होती है स्त्री। इसीलिए स्त्रियों की मधुर वाणी और प्रलोभन का उपयोग करके सामान्य पुरुषों से कई काम निकलवाए जाते हैं। उनसे अपने व्यक्तिगत जीवन और ज़रूरतों का त्याग करवाकर अधिक और अधिक काम करवाया जाता है, और उन कामों में फंसाया जाता है जो करना उनका काम है भी नहीं।

जब एक असंस्कारी स्त्री देखती है कि, सामने वाला पुरुष उसकी सुंदरता को देखकर मोहित हो गया है, तो ऐसे में वो बस मीठी मीठी बातें बोलकर और परोक्ष रूप से प्रलोभन देकर उससे अपने काम करवा लेती है और काफ़ी बार तो उसके पैसों और संपत्ति का भी उपयोग कर लेती है। और बदले में ऐसे असंयमी पुरुष को कुछ भी नहीं मिलता।

यह तो फिर भी काफ़ी हद्द तक सह्य बातें है। सबसे असह्य बात तो यह है कि, वर्तमान में लाखों निर्दोष युवा पुरुषों का जीवन इन्हीं कारणों से फर्जी बलात्कार और दुर्व्यवहार के मामलों में बर्बाद हुआ है। और उनका सबसे बड़ा दोष बस यही था कि वे उन स्त्रियों के लुभावनी बातों में आ गए और समय पर जब मर्यादाएँ बनानी चाहिए थी तब नहीं बनाई।

हालाँकि शोषण तो स्त्रियों का भी करते हैं दुष्ट पुरुष। परंतु सबसे बड़ी समस्या यहाँ यह है कि स्त्री के लगाएँ आरोपों को आँख बंद करके प्राथमिक रूप से सुना जाता है। जबकि पुरुष के आरोप को गंभीर रूप से कोई नहीं लेता। ऊपर से बिना किसी प्रमाण के उन्हें ही दोषी ठहरा दिया जाता है।

और वर्षों सजा काटने के बाद भी यदि किसी कारणों से वे निर्दोष प्रामाणित हो भी जाते हैं तो भी उन्हें हमेशा के लिए उसी दृष्टि से देखा जाता है।

और सबसे बुरी परिस्थिति तब होती है कि, कामेच्छाओं के वेग में आकर आप सच में कोई ऐसा कृत्य कर देते हो जोकि आप कभी करना नहीं चाहते थे; परंतु परिस्थितियों, आसपास के उत्तेजक वातावरण और आपके असंयम की वजह कर बैठे। तब तो आप कभी स्वयं को क्षमा नहीं कर पाओगे।

अतः याद रखें!

आपकी कुछ पलों की कामेच्छा (lust) आपके करियर, संबंध, परिवार, आध्यात्मिक साधना और संपूर्ण जीवन को बर्बाद करने के लिए पर्याप्त है।

अभी वीर्यनाश के हानिकारक असरों को तो अच्छे से जान लिया। परंतु क्या मात्र हानि से बचने के लिए ही ब्रह्मचर्य करना है या फिर वीर्यरक्षा करने से कोई लाभ भी होता है? क्या होता है आख़िर वीर्य रक्षा से?

क्या होता है?

अरे! क्या नहीं होता है?

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