
विराम चिन्ह (Viram Chinh in Hindi)
परिभाषा – भाषा के लिखित रूप में अभिव्यक्ति को सरल, सहज, रोचक और स्पष्ट बनाने के लिए जिन चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें विराम चिह्न कहते है।
— विराम शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है – ठहराव अथवा रुकना। अभिव्यक्तियों की पूर्णता हेतु वक्ता द्वारा बोलते समय शब्दों पर कहीं जोर देना पड़ता है, कभी ठहरना पड़ता है और कभी-कभी विशेष संकेतों का सहारा भी लेना पड़ता है।
लेखक भी संकेतों का सहारा लेता है जिससे पाठक इनकी सहायता से ठहर-ठहर कर, कुछ विराम लेकर लेखक के भावों से परिचित हो सके।
— निम्रलिखित एक ही वाक्य में विराम चिह्नों का प्रयोग करने पर निम्न समीकरण प्राप्त होते हैं, जैसे –
1. रोको मत, जाने दो।
2. रोको, मत जाने दो।
3. रोको मत जाने दो।
विराम चिन्ह के प्रकार या भेद – Viram Chinh Ke Parkar Ya Bhed in Hindi
1 . पूर्ण विराम ( । ) (Full Stop)
— इस चिह्न का प्रयोग निम्न दशाओं में होता है।
— वाक्य की समाप्ति पर, जैसे- महेश खेलता है।
— प्रायः शीर्षक के अंत में भी इस चिह्न का प्रयोग होता है। जैसे- यदि मैं प्रधानमंत्री होता।
— काव्य में दोहा, सोरठा, चौपाई आदि छन्दों के चरणों के अन्त में इस चिह्न का प्रयोग होता है।
जैसे- रघुकुल रीति सदा चलि आई, प्राण जाय पर वचन न जाये।
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2 . अल्प विराम (,) (Comma)
— इसका प्रयोग निम्न अवसरों पर किया जाता है।
— जब एक ही शब्द-भेद के दो शब्दों के बीच में समुच्चयबोधक न हो, जैसे- प्रकाश ने सेव, अमरूद और अंगूर खाये।
— समानाधिकरण शब्दों के बीच में, जैसे- अशोक की पुत्री मैना, उमेश की पत्नी है।
— जब कोई शब्द जोड़े से आते हैं तब प्रत्येक जोड़े के बाद, जैसे- संसार में दुःख और सुख, मरना और जीना, रोना और हँसना लगा ही रहता है।
— क्रिया विशेषण वाक्यांशों के साथ जैसे- उसने गम्भीर चिंतन के बाद, यह काम किया।
— जब किसी वाक्य में वाक्यांश अथवा खंड वाक्य एक ही रूप में प्रयुक्त हो तो अंतिम पद को छोड़कर शेष के आगे, जैसे – पुस्तक के अध्ययन से विचार पुष्ट होते हैं, बुरी संगत से बचाव होता है।
— जब छोटे समानाधिकरण प्रधान वाक्यों के बीच में कोई समुच्चय बोधक शब्द न हो तब उनके बीच में, जैसे- नभ मेघों से घिर गया, मूसलाधार वर्षा होने लगी।
— ‘कि’ के अभाव में, जैसे- मनोज जानता है, तुम कल यहाँ नहीं थे।
— संज्ञा वाक्य के अलावा मिश्र वाक्य के शेष बड़े उपवाक्यों के बीच में, जैसे- यही वह पुस्तक है, जिसकी मुझे आवश्यकता है। संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि जहाँ थोड़ा रुकने की आवश्यकता हो, वहाँ इस चिह्न (,) का प्रयोग किया जाता है।
3 . अर्द्ध विराम (;) (Semi Colon)
जहाँ अल्पविराम से कुछ अधिक एवं पूर्ण विराम से कुछ कम रुकने की आवश्यकता होती है, वहाँ इस चिह्न का प्रयोग होता है। साधारणत: इस विराम चिह्न का प्रयोग अग्रांकित अवसरों पर किया जाता है –
— जब संयुक्त वाक्यों के प्रधान वाक्यों में परस्पर विशेष संबंध नहीं रहता, जैसे- चाँदी बहुमूल्य धातु है; पर लोहे का भी कम महत्त्व नहीं है।
— उन पूरे वाक्यों के बीच में जो विकल्प से अंतिम समुच्चय बोधक द्वारा जोड़े जाते हैं, जैसे- श्याम आया; उसने उसका स्वागत किया; उसके ठहरने की व्यवस्था की और उसे खिलाकर वह चला गया।
— एक मुख्य वाक्य पर आधारित रहने वाले वाक्यों के बीच में, जैसे- जब तक हम गरीब हैं; बलहीन हैं; दूसरे पर आश्रित रहने वाले हैं; तब तक हमारा कल्याण नहीं हो सकता।
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4 . प्रश्नवाचक विराम (?) (Note of Interrogation)
इस चिह्न का प्रयोग प्रश्र सूचक वाक्यों के अंत में पूर्ण विराम के स्थान पर होता है। जैसे – आप क्या कर रहे हैं?
5 . विस्मयादिबोधक या सम्बोधन सूचक चिह्न (!) (Note of Exclamation)
— विस्मय, हर्ष, घृणा आदि मनोवेगों को प्रकट करने के लिए या जहाँ किसी को सम्बोधित किया जाता है वहाँ इस चिह्न का प्रयोग होता है, जैसे – अरे यह क्या हुआ! हे भगवान् उसकी रक्षा करो!
6 . अवतरण/उद्धरण चिह्न [(‘ ‘) (” “) (Inverted Comma)]
जब किसी दूसरे के कथन को ज्यों का त्यों उद्धृत करना होता है तब अवतरण चिह्न का प्रयोग किया जाता है। यह दो प्रकार का होता है – एकल उद्धरण चिह्न (‘ ‘) – इसका प्रयोग उस स्थिति में किया जाता है, जब किसी शीर्षक, नाम, उपाधि आदि को ज्यों का त्यों अवतरित किया जाये, जैसे रामधारी सिंह ‘दिनकर’ प्रसिद्ध राष्ट्रकवि थे। ‘दैनिक भास्कर’ बिहार का अग्रणी समाचार-पत्र है।
— दोहरा उद्धरण चिह्न (” “)- जब सम्पूर्ण अवतरण, गद्यांश, पद्यांश, कवितांश अथवा निबंधांश या भाषण के अंश को ज्यों का त्यों उद्धृत किया जाये, वहाँ दोहरा उद्धरण चिह्न प्रयुक्त होता है। जैसे – तिलक ने कहा, “स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है”।
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7 . निर्देशक चिह्न (-) (Dash)
इसका प्रयोग निम्न अवसरों पर होता है –
— समानाधिकरण शब्दों, वाक्यांशों अथवा वाक्यों के बीच में, जैसे- आँगन में ज्योत्स्ना- चाँदनी छिटकी हुई थी।
— किसी विषय के साथ तत्सम्बन्धी अन्य बातों की सूचना देने के लिए, जैसे- काव्य के दो अंग हैं- एक पद्य, दूसरा गद्य।
— किसी कवि, लेखक, रचनाकार का नाम लिखने के लिए, जैसे- रघुकुल रीति सदा चली आई- तुलसी।
8 . विवरण चिह्न (:-) (Colon Dash)
— इस चिह्न का प्रयोग उस अवसर पर किया जाता है जब किसी वाक्य के आगे कई बातें क्रम से लिखी जाती हैं।
— किसी वस्तु का सविस्तार वर्णन करने में इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है।
जैसे –
क्रिया के दो भेद हैं :- सकर्मक, अकर्मक।
निम्न शब्दों की व्याख्या कीजिए :- संज्ञा, विशेषण तथा क्रिया।
9 . योजक (समास) चिह्न (-) (Hyphen)
— सामासिक पदों के बीच में इसका प्रयोग होता है। जैसे- माता-पिता, रण-भूमि।
(1) मध्यवर्ती चिह्न
(2) योजक चिह्न
(3) संयोजक चिह्न
10 . कोष्ठक चिह्न ( (), [], {} ) (Brackets)
1 . ( ) यह चिह्न ऐसे वाक्यों या वाक्यांशों को घेरने के काम आता है जिनका मुख्य वाक्य से संबंध नहीं होता तथा भाव के स्पष्टीकरण के लिए जो वाक्य या वाक्यांश आवश्यक है, जैसे- राम (हँसते हुए) ने कहा अच्छा जाइये।
2 . [ ] यह चिह्न वर्गाकार कोष्ठक कहलाता है तथा भूल सुधारने व त्रुटि पूर्ति के लिये व्यवहृत होता है। जैसे – अनुवादित [अनूदित] ग्रंथ, ब्रज [व्रज], कुटी [र]
3 . { } – यह कोष्ठक सर्पाकार कोष्ठक कहलाता है, इसका उपयोग वाक्य में ऐसे शब्दों को मिलाने में होता है जो अलग पंक्तियों में लिखे जाते हैं,
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11 . संक्षेप सूचक चिह्न (०) (Abbreviation Mark)
इसे लाघव चिह्न भी कहते हैं। शब्द को संक्षिप्त रूप देने के लिए इस चिह्न का प्रयोग होता है, जैसे – दिनांक को दि०, पण्डित को पं० लिखा जा सकता है।
12 . लोप सूचक चिह्न (…….) (+ +)
— जहाँ किसी वाक्य या कथन का कुछ अंश छोड़ दिया जाता है, वहाँ इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है, जैसे –
1 . मैं तो परिणाम भोग ही रहा हूँ, कहीं आप………..
2. रघुकुल रीति सदा चली आई प्राण जाहि ++++
13 . उप विराम चिह्न (:) (Colon Mark)
— यह अर्द्धविराम से भी अधिक ठहराव का बोध कराता है।
जैसे – रश्मिधनुः एक समीक्षा राष्ट्रीय एकता : स्वरूप, समस्याएँ एवं समाधान।
14 . तुल्यता (समता) सूचक चिह्न (=) (Equivalent Mark)
— समता या बराबरी बताने के लिए इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है, जैसे- पवन = हवा, शिक्षित = पढ़ा-लिखा, एक रुपया = सौ पैसे।
15 . हंस पद / त्रुटि चिह्न (^) (Ommission Mark or Caret)
— इसे विस्मरण चिह्न भी कहते हैं। लिखते समय जब हम कुछ भूल जाते हैं तो उसे सुधारने के लिए इस चिह्न को लगाकर हम भूले हुए शब्द को भी लिख देते हैं।
जैसे –
जयपुर
जैसे – वह कल ^ जाएगा।
16 . पुनरुक्तिसूचक चिन्ह (” “) (Mark of Repetition)
इसका प्रयोग एक ही शब्द को बार-बार लिखे जाने (पुनरुक्ति) से बचने के लिए किया जाता है, जैसे –
नाम >>> निवासी >>> जाति
राम >>> जयपुर >>> मीणा
विजय >>> ” >>> “
17 . पादचिह्न/रेखिका चिन्ह (-) (Underline Mark)
— यह वाक्य के किसी शब्द या अंश के नीचे ध्यानाकर्षण के लिए लगाया जाता है। जैसे – केश खोलो। आँख बन्द करो। मोर को देखा।
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18 . दीर्घ उच्चारण चिह्न (ડ)
किसी अक्षर/वर्ण के बहुत लम्बे उच्चारण के लिए इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है। तत्सम शब्दों में ही इसका प्रयोग होता है।
जैसे – हे राऽऽम, आऽऽऽ, ओम, ऽऽऽऽ।
19 . पाद बिन्दु (.)
— अरबी फारसी के शब्दों के खास उच्चारण (शब्द पर जोर देने हेतु) के लिए अक्षरों के नीचे यह चिह्न लगाया जाता है। जैसे – ज़मीन, ख़िदमत, ज़मानत, ग़जल।
20 . अपूर्ण सूचक चिह्न (xxx) (Ellipses Mark)
— किसी लेख में से जब कोई जरूरी अंश छोड दिया जाता है; तब उसके स्थान पर यह चिन्ह लगाया जाता है।
जैसे – xxx
21 . समाप्तिसूचक चिन्ह (■■■)
— इस चिन्ह का उपयोग अधिकतर लेख या पुस्तक के अंत में करते हैं।
जैसे – ■■■
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हिंदी व्याकरण – Hindi Grammar
- हिंदी व्याकरण | वर्ण | स्वर वर्ण | व्यंजन वर्ण | शब्द | संधि | समास | उपसर्ग | प्रत्यय | संज्ञा | सर्वनाम | विशेषण | क्रिया विशेषण | वाक्य | लिंग | क्रिया | अव्यय | पुरुष | कारक | वचन | काल | विराम चिन्ह।
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