
महात्मा गाँधी पर निबंध – Mahatma Gandhi Par Nibandh in Hindi
1 . जन्म, 2 . शिक्षा एवं प्रारंभिक चरित्र, 3 . दक्षिण अफ्रिका में उनका जीवन, 4 . बिहार में, 5 . कॉंग्रेस के नेता, 6 . उनकी महत्ता के कारण, 7 . उनके महत्त्वपूर्ण कार्य, 8 . मृत्यु।
1 . काठियावाड़ के पोरबंदर में एक कुलीन वैश्य परिवार में मोहनदास करमचंद गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 ई० को हुआ था। उनके माता-पिता धनी व्यक्ति थे। पोरबंदर राज्य में उनके पिता, करमचंद उत्तमचंद गाँधी एक उच्च और जवाबदेह पद पर थे।
2 . स्थानीय प्राइमरी एवं हाई स्कूलों में ही उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। प्रवेशिका परीक्षा पास करने के बाद वे कानूनी पेशा के लिए योग्यता प्राप्त करने के लिए इंगलैंड गए। बचपन से ही वे सच्चे और ईमानदार थे। अपने चरित्र के संबंध में वे बड़े सावधान रहते थे।
3 . अपने को वकालत के लिए योग्य बनाकर वे भारतवर्ष आए और बंबई हाईकोर्ट में उन्होंने वकालत आरंभ की। अपने मुवक्किल के एक मुकदमे के संबंध में वे दक्षिण अफ्रिका में नेटाल गए। वहाँ उन्होंने देखा कि किस प्रकार भारतवासी दक्षिण अफ्रिका 127 कि यूरोपीय निवासियों द्वारा अपमानित किए जाते हैं।
उन्होंने नेटाल इंडियन कॉंग्रेस की स्थापना की। इसके तत्त्वावधान में उन्होंने उन दुःखों को दूर करने के लिए आंदोलन किया, जिनसे भारतवासी पीड़ित थे। उन्होंने सत्याग्रह नामक नए अस्त्र का आविष्कार किया। उन्होंने इस अस्त्र की सहायता से दृढ़तापूर्वक लड़ाई की। वे जेल गए पर अपने संकल्प पर डटे रहे। उन्हें अपने प्रयत्न में काफी सफलता मिली।
4 . उसी समय बिहार में यूरोपियन निलहे (नील की खेती करनेवाले) प्रजा पर बड़ा अत्याचार कर रहे थे। महात्मा गाँधी ने अपने कार्यक्रम का स्थानांतर मोतिहारी में किया। उन्होंने नील के किसानों का पक्ष लिया। उनके हस्तक्षेप से दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया।
5 . महात्मा गाँधी ने अपना असहयोग आंदोलन 1921 ई० में आरंभ किया। उसी समय से उन्होंने इंडियन नेशनल कॉंग्रेस को अपने नियंत्रण में ले लिया। उनकी कुशल देखरेख में इंडियन नेशनल कॉंग्रेस शक्ति प्राप्त करती गई। देश की आजादी के लिए उन्होंने समय-समय पर कई लड़ाइयाँ लड़ीं। उनके योग्य पथ-प्रदर्शन में देश अपने लक्ष्य पर पहुँच गया।
6 . महात्मा गाँधी भारत के ही सबसे महान पुत्र नहीं थे; बल्कि वे दुनिया के सबसे महान पुरुषों में से एक थे। अपनी राजनीति के कारण वे महान नहीं थे। उनकी महत्ता उनके जीवन के नैतिक दृष्टिकोण में थी।
उनके लिए सत्य सद्गुण या आदर्श नहीं था। यह उनका जीवन ही था। इसीने उन्हें उस अजेय शक्ति से सज्जित किया जो उनके पास थी। वे किसी से डरते नहीं थे। सत्य और न्याय के लिए वे संसार की सबसे बड़ी शक्ति का भी सामना करने के लिए तैयार रहते थे। उन्होंने गीता का गहन अध्ययन किया था और व्यावहारिक जीवन में वे उसकी शिक्षा का पालन करते थे।
7 . भारतवर्ष की स्वतंत्रता की प्राप्ति में गाँधीजी सफल हुए। वे सारे संसार में सत्य और अहिंसा की प्रधानता देखना चाहते थे। अभाग्यवश संसार आज दूसरी ओर झुका है। परंतु, संसार का भविष्य तभी सुरक्षित हो सकता है जब यह उनके बताए मार्ग पर चले। कोई दूसरा रास्ता खतरे से भरा है।
8 . दिल्ली में 30 जनवरी, 1948 को प्रार्थना सभा में जाते समय वे गोली से , मार दिए गए। भारतवर्ष ही नहीं, बल्कि सारी दुनिया उनकी मृत्यु से श्रीहीन हो गई है। उनकी आत्मा को भगवान शांति दें।
Final Thoughts –
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