
एक समय की बात है। एक नाविक अपनी छोटी सी नाव लेकर समुद्र को पार करने के लिए निकला। बीच समुद्र में पहुँच गया पर अब नाव आगे बढ़ा नहीं पा रहा था। क्योंकि जैसे ही आगे बढ़ने का प्रयास करता तुरंत ही नाव में पानी भरने लगता था और नाव डूबने लगती थी। कई सप्ताह बीत गए बाल्टियाँ उलटते हुए, परंतु नाव में पानी बढ़ता ही जा रहा था।
अब समुद्र के बीच में आ गया है तो वापस जा नहीं सकता था। और डूबने के लिए तो वो आया नहीं था। परंतु अब उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस डूबती नैया को लेकर इस विशाल समुद्र को पार कैसे करें?
वस्तुतः उसकी समस्या यही थी कि वह समस्या को बिना जाने और बिना उसे ठीक से समझे ही उसको हल करने का प्रयास कर रहा था, जो कि मूर्खता है।
तो आइए सबसे पहले यह समझते है कि, समस्या क्या है?
समस्या यह है कि वो जिस नाव को लेकर समुद्र को पार करने का प्रयास कर रहा है वही नाव डूबती जा रही है।. डूब क्यों रही है? क्योंकि उसमें पानी भरता जा रहा है। तो अब उसका हल क्या है? नाव में से पानी निकालना है।
ग़लत..
1. सबसे पहले पानी आ कहाँ से रहा है यह ढूँढना है।
2. फिर उसको नाव में आते हुए रोकना है।
3. उसके बाद नाव में भरा पानी निकालना है।
तो,
सबसे पहले पानी आ कहाँ से रहा है?
नाव के कोने में 7 छिद्र हैं, वहाँ से आ रहा है। बढ़िया !! अब सबसे पहले तो उन छेदों को भरना है, जिससे पुराना पानी निकालते समय नया पानी अंदर न आ सके। उसके बाद जाकर वो नाव में भरा पानी बाल्टी बाल्टी ख़ाली करेंगे। वरना ऐसे ही जीवन भर वो बाल्टियाँ उलटता रहेगा और फिर भी अंत में नाव उसे लेकर डूब जाएगी।
तो, क्या करना है उसे?
1. पहले छेदों को ढूँढना है।
2. फिर उन्हें बन्द करना है। जिससे नया पानी आना रुक जाएगा।
3. उसके बाद पुराना पानी बाल्टी बाल्टी से निकालना है।
हो गई समस्या हल। हो गई नाव तैयार। अब जाकर इस नाव के सहारे वो समुद्र सरलता से पार कर पाएगा।
यह नाविक और कोई नहीं स्वयं आप ही हैं। वो समुद्र इस भवसागर की कामवासनाएँ हैं, और वो नाव आपका ब्रह्मचर्य का संकल्प है, जिसकी सहाय से आप भवसागर का समुद्र पार करने वाले हो।
परंतु समस्या यह है कि आपकी ब्रह्मचर्य की नाव में कामवासनाएँ भरती जा रही है,
और आप उसे वर्षों से हरि नाम की बाल्टी से ख़ाली करने का प्रयास कर रहे हो, परंतु फिर भी नाव भरती ही जा रही है और आपको नाव के साथ डुबाती जा रही है।
वस्तुतः समस्या हमारे साथ भी यही है,
कि हम भी समस्या को बिना जाने और बिना उसे ठीक से समझे ही उसको हल करने का प्रयास कर रहे हैं, जो कि सरासर मूर्खता है।
अतः सबसे पहले, हम हमारी नाव में पड़े उन 7 छिद्रों को ढूँढेंगे जो हमारी इस ब्रह्मचर्य की नाव में कामवासना का खारा पानी भरकर हमें डूबा रही हैं। तो वो 7 छिद्र कौनसे है?
1. पोर्न
2. हस्त मैथुन
3. स्वप्न दोष (3 प्रकार के परस्त्री व्यभिचार)
4. विवाह पूर्व संबंध (Girlfriend Boyfriend)
5. विवाहेत्तर संबंध
6. वैश्यावृत्ति और
7. विवाह व्यभिचार
पहले इनको समझकर इन छिद्रों बंद करेंगे और फिर पानी निकालना सीखेंगे।