
डाकिया पर निबंध (Dakiya Par Nibandh in Hindi)
1 . भूमिका, 2 . उसका कार्य, 3 . उपसंहार ।
1 . डाकिया डाक विभाग का एक कर्मचारी है। उसका कार्य चिट्ठी, छोटा पार्सल और मनिआर्डर बाँटना है। लोग उत्सुकतापूर्वक डाकिये के आगमन की प्रतीक्षा करते है। जब डाकिया एक या दो पत्र लाता है, तो लोग खुश होते हैं। जब वह दरवाजे पर बिना ठहरे हुए चला जाता है तो लोग निराश हो जाते हैं।
2 . डाकिया बड़ा महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। पोस्ट आफिस का काम अंत में डाकिये के द्वारा ही पूरा होता है। एक व्यक्ति से दूर रहनेवाले दूसरे व्यक्ति के पास पत्र, मनिआर्डर और पार्सल इत्यादि भेजवाना ही पोस्ट आफिस का काम है।
चिट्ठी छाँटनेवाले, डाक ढोनेवाले और किरानी केवल पहले का कार्य करते हैं। डाकिया ही अंत में पत्र आदि वस्तुओं को उन व्यक्तियों के पास पहुँचा देता है, जिनके नाम से वे चीजें भेजी जाती हैं। डाकिया बहुत कम वेतन पाता है। फिर भी, वह अपना काम ईमानदारी से करता है।
मनिआर्डर की भारी रकम, बीमा कराया हुआ पार्सल और पत्र उसके सुपुर्द किए जाते हैं। डाकिया उचित व्यक्ति को चीजें देने की चेष्टा करता है। परंतु, कभी-कभी वह गलती करता है। तब उसे घाटा होता है।
उसे सच्चे हकदार की क्षतिपूर्ति करनी पड़ती है। कभी-कभी वह अधिक रुपए दे देता है। तब उसे अपनी जेब से क्षतिपूर्ति करनी पड़ती है। गाँव के पोस्ट आफिस में प्रायः एक ही डाकिया रहता है जो सप्ताह में दो बार पत्र आदि बाँटता है।
शहरों में अधिक संख्या में डाकिये रहते हैं। उन्हें मौहल्ला बँटा होता है। यहाँ तक कि एक ही मुहल्ले में विभिन्न डाकिये दिन में विभिन्न समय पर आते हैं। डाकिया के कार्य नियत किए रहते हैं।
डाकिया चिट्ठी पानेवाले व्यक्ति की खोज करने में अधिक कष्ट उठाता है और अधिक चेष्टा करके उचित व्यक्ति को ही उसे देता है। कभी-कभी वह एक आदमी का पत्र गलती से दूसरे को दे देता है।
3 . डाकिये का कार्य बड़ा ही उत्तरदायित्व का है। उसके ईमानदारी से कार्य करने पर बहुत-से लोगों का भाग्य निर्भर करता है। इसलिए डाकिये को बहुत ईमानदार और विवेकपूर्ण होना चाहिए।
Final Thoughts –
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