
सिनेमा पर निबंध (Cinema Par Nibandh in Hindi)
1 . भूमिका, 2 . सिनेमा-घर में पहुँचना, 3 . सिनेमा-घर का दृश्य, 4 . फिल्म, 5 . उपसंहार ।
1 . मुझे सिनेमा देखने से बहुत प्रेम नहीं है। मैं सिनेमा देखने बहुत कम जाता हूँ। गत सप्ताह में मैंने एक स्थानीय सिनेमा घर में एक अच्छा सिनेमा देखा। जब मेरी वार्षिक परीक्षा समाप्त हो गई तब मैंने एक मित्र के साथ सिनेमा देखने का निश्चय किया।
मेरे कुछ मित्रों ने मुझे कहा कि एलफिन्सटन में एक अच्छा सिनेमा चल रहा है। इसलिए मैं उसे देखना चाहता था ।
2 . एक दिन शाम में मैं एक मित्र के साथ सिनेमा घर गया। हमलोगों ने टिकट कटाने की खिड़की के पास बहुत लोगों की भीड़ को देखा। बहुत लोग एक कतार में खड़े थे। पहले तो मैंने सिनेमा देखने की आशा छोड़ दी, लेकिन मेरा मित्र कतार में खड़ा हो गया। कुछ देर बाद वह टिकट लाया।
3 . हमलोगों ने सिनेमाघर में प्रवेश किया। वहाँ बहुत भीड़ थी। लोग अपनी जगह खोजने की कोशिश कर रहे थे। फेरीवाले बहुत शोर कर रहे थे। हमलोग अपनी जगह खोजकर बैठ गए। कुछ ही समय में हॉल भर गया। हॉल में पुरुष, स्त्री और बच्चे थे।
अधिकतर लोग जोर-जोर से बातें कर रहे थे। कुछ बच्चे रो रहे थे और उनके माता-पिता उनको शांत करने की कोशिश कर रहे थे। जब पहली घंटी बजी तब सभी रोशनी बुझ गई।
हॉल में बिलकुल अँधेरा हो गया। कोलाहल समाप्त हो गया और लोग पर्दे की ओर देखने लगे। पहले कुछ समाचार चित्र दिखलाए गए। तब हमलोगों ने कुछ विज्ञापन देखा। हमलोग फिल्म देखने के लिए उत्सुक थे।
4 . जब दूसरी घंटी बजी तब सिनेमा शुरू हुआ। मैंने ‘नन्हा फरिश्ता’ फिल्म के बारे में बहुत सुना था। सिनेमा प्रारंभ से ही बहुत मनोरंजक था। प्रारंभ में हमलोगों ने तीन डाकुओं को डकैती करते हुए देखा।
उनलोगों ने एक धनी व्यक्ति की हत्या करके उसका सब धन लूट लिया। जब उनलोगों ने धनी व्यक्ति की छोटी बेटी को देखा तो उनका कलेजा पिघल गया। वे उस सुंदर लड़की की हत्या नहीं कर सकते थे। वे उसे अपने साथ ले गए। उसकी देखभाल करना एक कठिन काम था, लेकिन वे उसे प्रसन्न करने के लिए बहुत प्रयत्न करते थे।
धीर-धीरे छोटी लड़की ने उनके व्यवहार में परिवर्तन ला दिया। उसने उनलोगों को महसूस करवाया कि उन्हें अपना बुरा काम छोड़ देना चाहिए। अंत में वे डकैती छोड़कर अच्छे नागरिक बन गए। इस प्रकार फिल्म की कहानी बहुत मनोरंजक थी। वह करुण थी।
निर्दय डकैतों पर छोटी लड़की का बहुत प्रभाव पड़ा। सिनेमा शिक्षाप्रद भी था। उससे हमें शिक्षा मिली कि प्रेम के द्वारा अपराधियों का सुधार किया जा सकता है। फिल्म का संगीत भी अच्छा था ।
5 . जब सिनेमा समाप्त हुआ तब मैंने महसूस किया कि मैं कुछ देर तक दूसरे संसार में था। मैं अपने मित्र के साथ सिनेमा घर से रवाना हुआ। मैंने मनोरंजक कहानी और मधुर संगीत के कारण फिल्म को पसंद किया।
Final Thoughts –
यह हिंदी निबंध भी पढ़े –