
1. पोर्न
आज के समय में एक युवा एक दिन में भाँति भाँति की इतनी सुंदर नग्न-अर्द्धनग्न स्त्रियों को देख सकता है जितना संपूर्ण इतिहास में कोई भी पुरुष (राजा महाराजा भी) अपने पूरे जीवन में हज़ारों सोने के सिक्के देकर भी नहीं देख सकता था।
आज का छोटे से छोटा बच्चा टिक टॉक पे जो मुफ़्त में दिन रात देखता रहता है वो देखने के लिए पहले के राजा महाराजा हीरा मोती गिराते थे, तब जाकर उनको यह देखने को मिलता था।
आपको क्या लगता है, यह सामान्य बात है?
युवाओं के मस्तिष्क पर, उनके भविष्य पर और इस समाज के ढाँचे (Structure) पर इसका कोई असर नहीं पड़ता? असर पड़ता है!! और अत्यंत ही बुरा असर पड़ता है।
मनुष्य के पुरुषार्थ की प्राथमिक प्रेरणा (Motivation) भूख है।
जीवन में भूख ही मनुष्य को कार्य करने के लिए, उद्यम करने के लिए, साहस करने के लिए, जोखिम (Risk) उठाने ले लिए तथा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
पालतू कुत्ते, बिल्लियाँ और प्राणी संग्रहालय के शेर भालू आदि जानवर निर्बल, मोटे, आलसी और अल्पायु क्यों होते है? क्योंकि उन्हें प्रतिदिन तैयार खाना मिल जाता है। तो मेहनत करने की उन्हें कोई भूख ही नहीं रहती है।
जीवन में कुछ भी पाने के लिए सर्वप्रथम मनुष्य में भूख (तीव्र इच्छा) की आवश्यकता होती है। भूख न होने पर कोई भी मनुष्य काम नहीं कर पाता। और क्योंकि इस भौतिक जगत में भोग की भूख ही एक सामान्य मनुष्य का सबसे बड़ा मोटिवेशन है, जब वही भोग सरलता से पड़े-पड़े मिल जाता है तो मनुष्य का मोटिवेशन काम करना बंद कर देता है।
आज के समय में एक औसत पुरुष अपने चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति नहीं कर सकता इसका मुख्य कारण भी यही है।
एक पुरुष में सुंदर स्त्री की प्राप्ति की इच्छा और एक स्त्री में सक्षम पुरुष की प्राप्ति की इच्छा इस संसार के अस्तित्व का प्राथमिक आधार है। उसी के अनुसार पूर समाज का जीवन ढलता है।
इस भौतिक जगत के अस्तित्व का मुख्य कारण हमारी कामेच्छा ही है। इसीलिए उसी को मध्य में रखकर सृष्टि की रचना, उसका पालन, उसकी वृद्धि और उसका अंत भी बनाया गया है।
अतः जाने अनजाने हर जीव के जीवन में मान, मर्यादा, समृद्धि, धर्म, अर्थ आदि को प्राप्त करने की वही प्राथमिक प्रेरणा होती है।
जिसकी प्राप्ति करते समय ही उसके पुरुषार्थ की वृद्धि होती है। फिर अपने काम और इच्छाओं की पूर्ति से उसमें त्याग की भावना जागती है। फिर उसी पुरुषार्थ का उपयोग करके भोगों से उठकर वो मोक्ष की प्राप्ति करता है।
और इसी तरह समस्त भौतिक अस्तित्व को भगवान ने ऐसे बनाया है कि धर्म से अर्थ, अर्थ से काम और धर्मोचित काम प्राप्ति से वैराग्य प्राप्त कर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इससे जीव के काम की पूर्ति भी हो जाती है और उसका मोक्ष भी हो जाता है।
परंतु जब व्यक्ति को पोर्न मिलता है तो उसे बिना मेहनत के पड़े पड़े वो भोग मिल जाता है और फिर वो अपने पुरुषार्थ की वृद्धि कभी नहीं कर पाता और ऊपर से उस भोग से कभी त्याग की भावना भी नहीं जागती, क्योंकि वो संपूर्ण भोग न होकर बस भोग का भ्रम स्वरूप होता है।
जिसके कारण वो हमेशा के लिए भोग के भ्रम में फँसा रहता है
और कभी मोक्ष की प्राप्ति नहीं कर पाता।
जितनी बार पोर्न देखकर एक पुरुष अपना वीर्य बहा देता है, उतनी बार उसका अस्तित्व उसका पुरुषार्थ बढ़ने से रोक लेता है। वो यह सोचकर कि यदि इतने कम पुरुषार्थ से इसकी ध्येय की प्राप्ति हो गई है तो उसे अधिक पुरुषार्थ की क्या आवश्यकता है?
इसी कारण जब जब आप पोर्न देखकर आप वीर्य बहाते हो, तब तब आप ब्रह्मांड को यह बता रहे हो कि, ‘बस अब मुझे अधिक सक्षमता की कोई आवश्यकता नहीं है। मेरे में अभी जितना बल है, बुद्धि है, शक्ति है सब पर्याप्त है, इससे ज़्यादा जीवन में अब प्राण आदि की मुझे कोई आवश्यकता नहीं है।’
इसीलिए ऋषिमुनियों ने शास्त्रों में बताया है कि,
मरणं बिन्दु पातेन जीवनं बिन्दु धारणात् ।।
अर्थात्,
‘वीर्य धारण ही जीवन है और वीर्य का व्यय ही मृत्यु है।’
और चलो इतने बड़े स्तर पे बात नहीं भी करनी है, तो भी एक बात तो समझ ही लेनी चाहिए कि, पोर्न देखना मतलब अपने आप को नपुंसक बनाना।
क्योंकि कोई ऐसी स्त्री जो आपको पसंद आ रही है उसे आपकी आँखों के सामने कोई और पुरुष भोग रहा हो, और आप कोने में बैठकर अपने जननांग को हाथ में लेकर बैठे रहे हो, यह कृत्य कोई नपुंसक ही कर सकता है।
एक वीर्यवान पुरुष को जब कोई स्त्री पसंद आती है तो वो अपने आपको उस स्तर का सक्षम बनाता है जिससे वो और उसके माता पिता खुशी खुशी उस स्त्री का हाथ उसके हाथ में दे। और फिर उससे वो प्रेम प्राप्त करता है।
जबकि कल्पनाएँ करके हस्तमैथुन करना आपके पौरुष का संपूर्ण हनन कर देता है। क्योंकि यदि आपको कोई सुंदर स्त्री पाने की इच्छा भी है, (जो कि किसी भी पुरुष के लिए संपूर्ण रूप से प्राकृतिक है) तो भी उसके लिए आपको मेहनत करनी होगी, पुरुषार्थ करना होगा और उस योग्यता को प्राप्त करना होगा कि जिससे ऐसी सुंदर स्त्री आपको चुने।
परंतु पोर्न देखकर आप उससे हस्त मैथुन करके जब वीर्य निकाल देते हो, तो वह योग्यता प्राप्त करने की आपकी वो इच्छा और प्रेरणा भी चली जाती है और फिर आप बस सपनों की दुनिया में ही जीने लगते हो, वास्तविक जीवन में जो आपको चाहिए वो कभी प्राप्त नहीं कर पाते हो।
इसलिए यदि आपको पोर्न की आदत है तो यह समझ लीजिए कि,
1. आप वो व्यक्ति नहीं हो जो आपको बनना है,
2. आपको पता है कि आप बन सकते हो,
3. और आपको बनना चाहिए।
क्योंकि यदि आप वो व्यक्ति होते तो आपके पास इन बकवास हवाबाज़ी चीज़ों के लिए कोई समय ही नहीं होता और न ही आपको इसकी ज़रूरत होती ।
परंतु आपको पोर्न की आवश्यकता पड़ रही है इसका अर्थ है, कि आप संपूर्ण रूप से पुरुष नहीं हो। यदि एक सच्चा पुरुष कामी भी है तो भी अपने आपको योग्य बनाने पर ध्यान देता है जिससे अधिक स्त्रियों का वरण कर सके।
परंतु यह भी है कि जब सच में आप उस स्तर की योग्यता को प्राप्त कर लेते हो तो आपको फिर इन सब छिछले भोगों में इतनी खास रुचि नहीं रहती।
क्योंकि इस भौतिक संसार में अधिकतर चीज़ों की तीव्र इच्छा हमें तभी तक रहती है जब तक हमें वो प्राप्त नहीं हो जाती। जैसे ही वह वस्तु हमें प्राप्त हो जाती है, उस चीज़ की तृष्णा (craving) समाप्त होने लगती है तथा किसी और ऐसी चीज़ की तृष्णा जगती है जो हमारे पास नहीं है।
ऐसे ही यह चक्र जन्मों जन्मों से चलता आ रहा है और चलता रहेगा, जब तक हम इसको रोकने के लिए नियमबद्ध न हो जाएँ।
परंतु चलिए मान लेते हैं कि अभी आप उस आध्यात्मिक स्तर पर नहीं हो कि आप उस हद तक त्याग कर सको, फिर भी जवाब यही है कि,
आप वो पुरुष बनने का प्रयास करो जो…
1. आपको पता है कि आप बन सकते हो,
2. आपके बनने से आपका और आपसे जुड़े सभी लोगों का भला होगा,
3. इसीलिए आपको बनना ही चाहिए,
4. परंतु आप बन नहीं रहे हो।
यही सबसे अंतिम समाधान है।
इसके लिए आपको सर्व प्रथम अपने जीवन से सभी प्रकार का पोर्न संपूर्ण रूप से त्याग देना आवश्यक है। जो की मुख्य चार प्रकार के है..
1. सचित्र पोर्न : पोर्न वेबसाइट पर मिलने वाले अभद्र फ़ोटोज़, वीडियो, पोस्टर और ऐसी फ़िल्में जिसमें उत्तेजक दृश्य हो।
2. व्यावहारिक पोर्न : जहाँ पर मर्यादाहीन रूप से स्त्रियाँ उत्तेजक कपड़े पहनती और उकसाती हो वे सारी जगहें। जैसे की कैसिनो, डांस बार, पार्टियाँ, म्यूजिक कंसर्ट, नाटक, थियेटर, मॉल और मॉडर्न बीच आदि।
3. शाब्दिक पोर्न : मित्र आदि में स्त्रियों के बारे में बातें करना, माँ बहन की गालियाँ देना (मज़ाक़ में भी नहीं), न्यूज़पेपर और मैगज़ीन आदि में आने वाली उत्तेजक कहानियाँ या लेख।
4. सॉफ्ट पोर्न : सोशल मीडिया पर उत्तेजक फोटो और वीडियो पोस्ट करने वाले फ़िल्म कलाकार, मॉडल, मॉडर्न नचनिया, और Meme पेज।
जी हाँ!
Meme पेज भी। क्योंकि पोर्न देखना कोई आपके स्वस्थ जीवन में अलग से उभरी बुरी आदत नहीं है। वो एक बड़ी समस्या का भाग है, जो कि है तामसिक और निर्बल मन।
इस समस्या को हल करना है, तो आपको अपना मन मज़बूत बनाना होगा। और आप Meme आदि निरर्थक चीज़ें देखकर ऐसा मज़बूत मन नहीं बना सकते।
अतः यदि आप अपने मन को सच में मज़बूत बनाना चाहते हो
तो आज और अभी सारे Meme आदि निरर्थक पेज, और सॉफ्ट पोर्न फैलाने वाले फ़िल्म कलाकार, मॉडल और मॉडर्न नचनियों को अनफोलो कर दें।
क्योंकि ये सभी प्रकार का पोर्न समुद्र के खारे पानी की तरह होता है, लगता है कि पानी है, एक बार पीऊँगा तो प्यास बुझ जाएगी, परंतु कितना भी पी लें, प्यास कभी नहीं बुझती, ऊपर से जितना पियो उतनी और अधिक बढ़ती है।
अतः आज ही इन सभी प्रकार के पोर्न को जीवन से निकाल दो।