
7. वैवाहिक व्यभिचार
जी हाँ!
विवाह के अंदर भी ब्रह्मचर्य टूट सकता है। वैसे आदर्श रूप से सिर्फ़ संतान प्राप्ति के लिए ही संभोग करना चाहिए। परंतु फिर भी विवाह के अन्तर्गत पति पत्नी के सुख के लिए किया गया संभोग भी स्वीकार्य है। और न ही मात्र स्वीकार्य है परंतु यदि दोनों में से किसी एक की भी इच्छा है तो पूरी करना पति पत्नी का परस्पर कर्तव्य है।
हालांकि इसके भी कुछ नियम हैं।
जिनका पालन न करने पर ब्रह्मचर्य खंडित हो जाता है। जैसे कि…
1. स्त्री रजस्वला हो तब संभोग करने से न ही मात्र आपका ब्रह्मचर्य खंडित होता है परन्तु आपको ब्रह्महत्या का पाप भी लगता है।
2. कामेच्छा के वश में आकर पत्नी को बल आदि के प्रयोग से संभोग के लिए मजबूर करना भी आपके ब्रह्मचर्य का खंडन करता है। पति की इच्छाओं की पूर्ति करना पत्नी का कर्तव्य है। परंतु इसका अर्थ यह भी नहीं है कि पति अपने स्वामित्व की मर्यादा का दुरुपयोग करे।
3. पति पत्नी दोनों की इच्छा होने के पश्चात भी पोर्न, हस्तमैथुन व सभी अप्राकृतिक संभोग से भी आपके ब्रह्मचर्य का खंडन करता है।
अतः इन सभी प्रकार के वैवाहिक व्यभिचार से भी एक ब्रह्मचारी को बचना अत्यंत ही आवश्यक है।
परंतु यह सब जानने के बाद अब एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न यह आता है कि हम में से अधिकतर लोग सहज रूप से अपना ब्रह्मचर्य कभी तोड़ना नहीं चाहते। फिर भी जाने अनजाने तोड़ ही देतें हैं। ऐसा क्यों?
तो सबसे पहले इस समस्या का मूलभूत भावनात्मक कारण जानना अत्यंत ही आवश्यक है।
कि आख़िर, क्यों तोड़ता है कोई ब्रह्मचर्य?