
4. विवाह पूर्व संबंध : (Girlfriend Boyfriend) :
आज के समय में जब लड़के लड़कियाँ स्कूल कॉलेज और ऑफिस हर जगह बिना किसी मर्यादा के मिल जुल रहे हैं। ऐसे में अत्यंत ही सहज है कि युवा लड़के लड़कियों में परस्पर आकर्षण होगा। यह प्रकृति का नियम है। इसको हम बदल नहीं सकते।
परंतु इस आकर्षण को बिना किसी विवाह संस्कार के संबंध में बदल देना और उसके पीछे अपनी जवानी का अमूल्य समय और शक्ति व्यय करना न केवल बचकाना है परंतु मूर्खतापूर्ण काम भी है। इस मूर्खता का परिणाम फिर आप वर्षों तक भोगते हो। और कुछ स्थितियों में जीवन भर तक भी।
जवानी में जब शारीरिक हार्मोन्स काम करते हैं तो हर किसी को लगता है कि ‘मेरा प्रेम सच्चा है, मेरा कोई मोह नहीं है बल्कि सच में निःस्वार्थ प्रेम है।’ परंतु यह बस आपके हार्मोन्स का खेल है।
आपको कोई अनुमान नहीं है कि सच्चा प्रेम किसे कहते हैं। क्योंकि प्रेम की परिभाषा करते हुए ऋषि मुनि शास्त्र में दो शब्दों का उपयोग करते है,
अहेतुकीय (Unconditional) : बिना किसी स्व हेतु, स्वार्थ या शर्त के।
अप्रतिहता (Nonstop) : किसी भी परिस्थिति में कम न होकर अटल रहे।
क्या आपको लगता है कि आपके प्रेम के पीछे कोई हेतु या स्वार्थ नहीं है? क्या आपको लगता है कि किसी भी हालत में आपका प्रेम अटल रहेगा?
यदि आप अभी भी इस भ्रम में हो, तो आप एक बार अपने आपसे इतने सवाल पूछ लें।
1. क्या कल उठकर आपकी प्रेमिका को कोई ऐसी भयानक बीमारी या श्राप मिल जाए जिससे उसके अंग अंग पर रक्त और पस से भरे फोड़ें हो जाएँ और आप जीवन भर उसके शरीर को स्पर्श नहीं कर पाओगे, सिर्फ़ उसका पालन पोषण, रक्षण और सेवा करना है, तो भी करोगे क्या?
2. क्या कल उठकर आपकी प्रेमिका आपके सामने आपके किसी दोस्त दुश्मन या संबंधी से मोहित होकर उससे शरीर संबंध बनाने लगे तो भी क्या उसकी ख़ुशी में ख़ुश होकर फिर भी उसपर मर मिटोगे?
3. क्या कल उठकर आपकी प्रेमिका एक आँख, एक कान, एक स्तन, एक हाथ, और एक पैर से हीन हो जाए और उसकी दाढ़ी मूँछ उगने लगे और मर्दाना आवाज़ हो जाए तो भी क्या अभी की तरह उसपर मर मिटोगे?
4. क्या कल उठकर आपकी प्रेमिका बिना दांत और बाल की 100 वर्ष की बूढ़ी अम्मा बन गई तो भी क्या अभी की तरह उसपर मर मिटोगे?
5. क्या कल उठकर आपकी प्रेमिका पुरुष अंगों के साथ लड़का बन जाए तो भी क्या अभी की तरह उसपर मर मिटोगे?
6. क्या कल उठकर आपकी प्रेमिका एक सूअर में बदल जाए तो भी क्या अभी की तरह उसपर मर मिटोगे?
नहीं ना?
तो फिर इस प्रकार के सच्चे प्रेम के भ्रम से बाहर निकलें। सब देह की सुंदरता और जवानी के हार्मोन्स का खेल है। उससे मोहित होना इंद्रियों का काम है, कुछ नया नहीं है इसमें। परंतु इसको सच्चा प्रेम मान लेना और उसके पीछे जवानी का उत्तम समय, शक्ति और ध्यान व्यय करना मूर्खता है।
और यदि अभी भी लगता है की आपको सच में प्रेम हुआ ही है तो फिर दिखाइए अपना पौरुष और सीधा उसके पिता के पास जाकर लड़की का हाथ माँग लीजिए। फिर पिता हाथ दे तो भी स्वीकार लें और डंडे दे तो वो भी स्वीकार कर लीजिए।
यदि इतनी हिम्मत नहीं है तो फिर फोकट में डींगें हाँकने बंद करें और इतने सक्षम बनें की लड़की के पिता स्वयं अपनी बेटी का हाथ आपके हाथ में देना पसंद करे। और विवाह के पश्चात जब वो आपको समर्पित हो जाए तब अपने पति धर्म का पालन करके, पत्नी रूप में उसका पालन पोषण और संरक्षण करके उससे भरपूर अपना निःस्वार्थ प्रेम जताएँ।
परंतु जब तक पुरुष विवाह संस्कार से स्त्री की संपूर्ण ज़िम्मेदारी न उठाए और स्त्री विवाह संस्कार से पुरुष को समर्पित न हो तब तक एक दूजे से संबंध बांधना न केवल बचपना और मूर्खता है अपितु घोर पाप भी है।
यदि आप अभी युवावस्था में हो और ऐसे गर्लफ्रेंड बनाने में लगे हो तो जान लीजिए कि बिना विवाह के एक स्त्री को जीवन में स्थान देने का मतलब है कि, धन संसाधन आदि तो व्यय होंगे ही, परंतु सबसे बड़ा व्यय वो नहीं है। युवावस्था में आपके लिए सबसे अधिक मूल्यवान होता है आपका..
1. समय (Time) : लड़की को रिझाने के लिए उसके पीछे पीछे घूमना,
अच्छे अच्छे कपड़े पहनना, उसकी एक दृष्टि की प्रतीक्षा में निरर्थक स्थानों पर समय व्यतीत करना, उसके रीझ जाने के पश्चात भी उसको खुश रखने के लिए अपनी ज़िम्मेदारियों को छोड़कर उसके लिए समय निकालना और रात रात भर बातें करना।
2. ध्यान (Attention) : बातें ख़त्म होने के पश्चात भी जी न भरने से
उससे और बातें करने के लिए प्रतीक्षा में अपने और काम में से ध्यान गवाना। वो यदि किसी और को देख भी लें तो भी उसकी चिंता में रात दिन मन भटकाते रहना। यदि ध्येय पर मन लग भी गया तो भी संबंध टूटने के डर से ध्येय पर से ध्यान हटा कर उसको देना।
3 . भावनात्मक निवेश (Emotional Investment) : इतना सब करने के पश्चात भी जब आपके संबंध से ऊब कर वो किसी और के साथ संबंध बनाना शुरू करे, तब हृदय की असह्य पीड़ा में महीने बिगाड़ देना। जितना अधिक साथ में रहे हो, जितना अधिक आपने समय, संसाधन, ध्यान और भावनात्मक निवेश किया है, उसके जाने पर उतना ही अधिक असह्य पीड़ा होती है। ऐसे में काफ़ी मूर्ख युवा अपने आपको हानि तक पहुँचाने लगते हैं। कुछ महामूर्ख अपने प्राण ले लेते हैं। और कुछ प्रचंड महामूर्ख उस लड़की को हानि पहुँचाने चले जाते हैं।
युवावस्था में होते ये सारे संबंध असंयमित इंद्रियों का मोह जाल होता है।
जो कि व्यक्ति को अंधा बना देता है और उसकी बुद्धि क्षीण करके उसे अल्पबुद्धि बना देता है। ऐसे लोग अपने सामने खड़े विनाश को भी नहीं देख सकते और अपने ही हाथों से अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारकर खुद दलदल में कूद जाते है।
जबकि एक ब्रह्मचारी भली भाँति जानता है कि युवावस्था में होने वाले आकर्षण और कुछ नहीं अपितु हार्मोन और इंद्रियों के कारण होते है। अतः वो उसे आकर्षण की तरंग जानकार उसे सहन कर लेता है।
वो इन तरंगों पे से ध्यान उठाकर उसे अपने उच्च ध्येयों की प्राप्ति में लगाता है। क्योंकि वे जानते है कि गर्लफ्रेंड न ही मात्र उनका ब्रह्मचर्य तुड़वाएगी परंतु उसको अपने ध्येय से भी दूर रखेगी।
क्योंकि गर्लफ्रेंडें कभी योगवृत्ति से नहीं बनती, मात्र भोग वृत्ति से ही बनती है। और भोगवृत्ति ध्येय प्राप्ति के लिए सबसे हानिकारक होती है।
जो व्यक्ति एक बार भोग की इच्छाओं में घुस जाता है, उसके लिए अपने ध्येय के प्रति समर्पित और अनुशासित रहना असंभव हो जाता है। हालाँकि इसका अर्थ यह भी नहीं है कि आप अपने काम की पूर्ति नहीं कर सकते।
इसी लिए भगवान ने विवाह संस्कार की रचना की है। जिसमें आप ज़िम्मेदारी के साथ सार्थक रूप से अपने धर्म के पालन से ही अपनी कामपूर्ति कर सकते हो।
इसीलिए एक गर्लफ्रेंड और एक विवाहिता पत्नी में बड़ा अंतर होता है। गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड के संबंध में थोड़ी सी तकरार होने या बेहतर व्यक्ति से मिलने पर संबंध सरलता से टूट जाता है।
गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड का संबन्ध भोगवृत्ति पर बना होता है। अधिकतर बॉयफ्रेंड को भोग चाहिए होता है, और गर्लफ्रेंड को सतत किसी न किसी रूप में आपसे भावनाएँ, ध्यान (Attention), ड्रामा और मनोरंजन (Entertainment) चाहिए होता है। क्योंकि स्त्रियाँ भावना केंद्रित होती हैं और बहुत ही सरलता से ऊब (bore) जाती हैं।
ये सब आपसे न मिलने पर या तो वो आपके जीवन में जाने अनजाने ड्रामा बनाएगी या तो आपको छोड़कर जिससे ड्रामा मिलता है उसके पास चली जाएगी। क्योंकि गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड के संबंध में कोई ज़िम्मेदारी से नहीं बंधा होता।
परंतु एक बुद्धिमती स्त्री जब विवाह करती है, तो वो अपनी ज़िम्मेदारियों को भलीभाँति समझती है। तो जीवन में होने वाली छोटी मोटी अनबन और विवाद आदि के कारण संबंध के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों से नहीं हटती है।
एक संस्कारी पत्नी अपने संबंध में ड्रामा नहीं खोजती है। उसके जीवन में ड्रामा करके उसे अपने ध्येय से दूर नहीं ले जाती है, परंतु उसे अपने ध्येय पर मेहनत करने के लिए प्रेरित करके उसकी सहायक बनती है।
और ऐसी पत्नी का भरण पोषण और रक्षण करने के लिए पुरुष भी सतत मेहनत करने के लिए प्रेरित रहता है। और एक दूजे के प्रति अपने कर्तव्यों का निःस्वार्थ पालन ही पति पत्नी के संबंध को प्रगाढ़ बनाता है।
परंतु यदि आपको ऐसी पत्नी चाहिए तो भी आपको सर्वप्रथम अपने आपको उतना सक्षम बनाना होगा की ऐसी संस्कारी और संयमी स्त्री और उसका परिवार आपका वरण करे।
और उसके लिए युवावस्था में आपको अपना ध्यान अपनी सक्षमता को बढ़ाने में लगाना होगा, न की गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड के बचकाने कृत्यों में।
तदुपरांत जो लोग अपनी युवावस्था में ब्रह्मचर्य का पालन नहीं करते उन लोगों की यह बिना ज़िम्मेदारी के स्त्री का भोग करने की वृत्ति कभी नहीं जाती है।
ऐसे लोग अपनी असंयमित कामवासना के कारण विवाह के पश्चात भी चोरी छुपे अन्य स्त्रियों से मिलते और उनसे शारीरिक संबंध बनाते हैं।
जिसे हम कहते हैं…………..