ब्रह्मचर्य पालन करने के लिए अपने मन की सफाई कैसे करे।

2. मन की सफ़ाई (Desexualising Mind)

जैसे हमने बाहरी चीज़ों को बदलकर वातावरण की सफ़ाई की वैसे ही अब अंदरूनी आदतों को बदलकर कर अब मन की सफ़ाई करेंगे।

मोबाइल की आदत :

जब तक आप मोबाइल से चिपक कर रहोगे आप अपने आप को कभी बदल नहीं पाओगे। क्योंकि आपके जीवन का मध्य मोबाइल बन गया है। और मोबाइल ही आपको नियंत्रण में लिए हुए है। अतः सबसे पहले अपने जीवन की डोर मोबाइल से उठाकर अपने हाथ में लीजिए।

  • अपने मोबाइल की 90% नोटिफिकेशन को बंद कर दें। ख़ास करके सभी सोशल मीडिया की। सिर्फ़ सबसे ज़रूरी नोटिफिकेशन ही रखें।
  • समय व्यर्थ करने वाले सारे ऐप्स मोबाइल से डिलीट कर दो।
  • पढ़ते, लिखते, सोते और ज़रूरी काम करते समय मोबाइल को एयरप्लेन मोड में करने की आदत लगाएँ।
  • मोबाइल का उपयोग मात्र खड़े रहकर करने का नियम लें। बैठे बैठे या लेटे हुए नहीं। इससे आप ज़रूरत से अधिक उसका उपयोग नहीं करोगे।
  • हर समय मोबाइल को जेब में रखना बंद करो। इससे वीर्य हानि होती है।
  • जब आप कोई काम कर रहे हो तो उसे अपनी दृष्टि से दूर कहीं रख दो।
  • भगवद्गीता या ऐसी कोई एक अच्छी पुस्तक हमेशा अपने बैग में रखें। □ बस में आते जाते या ख़ाली समय में पुस्तक पढ़ने की आदत डालें।

आलस्य की आदत :

  • गेम्स, मूवीज़, फ़ास्ट फूड, नशे और खा पी कर पड़े रहने आदि से मिलने वाले के सस्ते सुखों से घृणा करना सीखें।
  • अपने आपको पुनः संघर्ष में आनंद लेना सिखाएँ।
  • कठिन कार्यों को पूरा करने में आनंद लेना शुरू करो।
  • दिन में कभी भी कुछ भी न करें और सही दिनचर्या का पालन करें।
  • अपने दिन का कार्यक्रम बनाना शुरू करें (Schedule your tasks) याद रक्खें ‘आधी जीत तैयारी में ही होती है।’
  • मानसिक, आर्थिक और आध्यात्मिक उन्नति कराए ऐसे शौक पालना शुरू करें। जैसे कृषि, वाणिज्य, गौरक्षा, ग़रीब बच्चों को पढ़ाना, समाज सेवा करना, व्यापार करना, शास्त्र पठन, धर्म प्रचार आदि।
  • मॉडर्न म्यूजिक का त्याग करें और उसकी जगह अच्छे संत वाणी, सत्संग या अच्छे पॉडकास्ट सुनें। या फिर भजन, कीर्तन और अच्छे यथार्थ गाने सुनें। न की राजसिक और तामसिक अर्थहीन गाने। आपको भले न लगे परंतु उसका बहुत गहरा असर पड़ता है आपकी चेतना पर।

अपनी त्वरित इच्छाओं (Urges) को सहन कैसे करें?

1 . शुरुआत छोटी छोटी इच्छाओं को सहन करने से करो।

2 . जैसे की खुजली की इच्छा। जब खुजली की इच्छा हो, मत खुजाओ। उसे सहन करना शुरू करो। अपना ध्यान किसी और सही जगह लगाओ।

3 . फिर बोलने की इच्छा पर नियंत्रण करो। कहीं भी कुछ भी बोलने से पहले सोचो की, ‘क्या यहाँ मेरा बोलना आवश्यक है? बोलने से कुछ अच्छा होगा? न बोलने से कुछ बदलेगा?’

4 . इसके उपरांत समय समय पर मौन व्रत का पालन करो।

5 . फिर भूख की इच्छा पर नियंत्रण करो। दो भोजन के समय के बीच में कुछ छोटा मोटा नाश्ता भी मत लो। कुछ भी चबाने वाली चीज़ मत खाओ। दो भोजन के बीच कम से कम 5-6 घंटे का अंतर रखो।

इतना करने पर भी आप समय के साथ अपनी कामुक इच्छाओं को भी सहन करने लगोगे। जोकि एक ब्रह्मचारी के लिए सीखना अत्यंत ही आवश्यक है।

क्योंकि अधिकतर बार यह कामुक इच्छाएँ (Sexual Urges) बस आपकी इंद्रियों में ऊर्जा की तरंगें होती है। और इनका होना कोई समस्या नहीं है। बल्कि यह एक स्वस्थ शरीर की पहचान है।

आपका शरीर यह कह रहा है कि, ‘इंद्रियों में ऊर्जा भर गई है’ (Battery Full), अब इसका उपयोग करके अपनी ध्येय प्राप्ति करें। परंतु हम है कि सही काम में न लगाने के बदले पोर्न हस्तमैथुन आदि से व्यय कर देते हैं।

इसलिए कितनी भी इच्छा हो जाए, जीवन में कितना भी दुःख आ जाए, कभी 5 सेकंड के सस्ते सुख के लिए अपनी ऊर्जा व्यय न करें।

परंतु,

ऐसी कामुक इच्छा आने के समय पर क्या करें?

विज्ञान भैरव तंत्र में शिवजी माता पार्वती को कहते है कि, जब शरीर में ऐसी कामुक ऊर्जा की तरंग आए तो उसे अच्छा या बुरा नहीं जानना चाहिए।

अच्छा जानने पर आपकी इच्छा बढ़ती है, और फिर आपके ब्रह्मचर्य का नाश होता है। और बुरा जानने पर मन में घृणा आती है और आत्मबल का हनन करती है।

अतः इन कामुक ऊर्जा की तरंग आने पर बस जान लें कि, यह एक कामुक ऊर्जा की तरंग मात्र है, चली जाएगी।

फिर एक गहरी सांस लें और उसे थोड़े समय रोककर फिर छोड़ दें। ऐसा 11 बार करने पर आपकी ऊर्जा पुनः शरीर की सभी इंद्रियों में प्रवाहित हो जाएगी और आप उसका सही जगह उपयोग कर पाओगे।

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