ब्रह्मचर्य पालन करने के लिए अपने बुद्धि की सफाई कैसे करे।

4. बुद्धि की सफाई (Desexualising Intelligence)

बचपन से मूवीज़ ने, सोशल मीडिया ने, मॉडर्न पुस्तकों ने और हमारे अपने समाज ने भी हमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस भ्रम में रखा है कि, जीवन का परम सुख संभोग में है। और इसमें इतना आनंद है इतना आनंद है कि जीवन में यदि यह प्राप्त नहीं किया तो कुछ नहीं किया।’

और ऐसी ही ग़लत धारणाओं से हमारी बुद्धि को दूषित किया है। परंतु जब हम साधु व शास्त्रों से ज्ञान लेते है तो हमें पता चलता है कि,

कामुक संभोग आख़िर है क्या?

मल मूत्र के द्वारों का खेल ही तो है! जिस जगह गलती से भी छू जाए तो भी तुरंत हाथ धो देते हैं, वहीं से तो हम इस तथाकथित सर्वोत्तम सुख की चेष्टा करते हैं।

और माया का खेल देखो इसमें,

फंसाया जाता है मुख और शरीर की लीपा पोती की गई सुंदरता से, और अंत में भोग मिलता कहाँ से है? शरीर की सबसे अपवित्र जगहों से।

अब वही व्यक्ति जिसके इन मल मूत्र के द्वारों को पाने के लिए आप इतना ऊधम मचा रहे हैं, उसी को यदि उन द्वारों का उपयोग करते हुए देख लें तो घृणा होती है। परंतु फिर भी यह माया उन्हीं मल मूत्र के द्वारों को सहलाने के सपने दिखाती है और हम उन्हें देखके खुश भी हो जाते हैं।

मतलब कुछ तो है इस माया में की,

है नहीं कुछ इसमें फिर भी लगता है कि सबकुछ इसी में है।

फंसाया कुछ और दिखाकर जाता है, और मिलता अंत में कुछ और ही है।

और मिलता भी है तो कितनी देर के लिए? और मिलने के बाद भी क्या शांति मिलती है? क्या फिरसे कभी इच्छा नहीं होती?

जी नहीं! मिलने के बाद तो और घृणा होती है।

परंतु फिर भी कुछ समय बाद बुद्धि पुनः नाश हो जाती है

और फिर फिरसे उसी को प्राप्त करने के लिए दिन रात मेहनत करने लग जाते हैं। यह सब माया में फँसी बुद्धि के लक्षण है।

तो फिर अब,

कैसे करें बुद्धि की सफ़ाई?

  • इस ब्रह्मचर्य पुस्तक का हर महीने एक बार पाठ करें।

एक बार में यह समस्त ज्ञान नहीं ले पाओगे और न ही इसका संपूर्ण पालन कर पाओगे। कर भी लिए तो भी यदि बार बार इसे पढ़कर अपनी बुद्धि की सफ़ाई नहीं करोगे तो पुनः बुद्धि दूषित हो ही जाएगी।

अतः इसे पुनः पुनः पढ़ें और हर बार यह जाँचे कि आप कितने नियमों का अभी भी पालन कर रहे हैं और कितने नियमों को भूल रहे हैं।

  • नियमित रूप से शास्त्रों का अध्ययन करें।

प्रतिदिन गीता, भागवत, रामायण, योगवशिष्ठ रामायण का त्याग अध्याय आदि का एक दो श्लोक का ही सही परंतु पाठ करना चाहिए। यह सभी आप हमारे Veducation App पर निःशुल्क पढ़ सकते हैं।

  • नियमित रूप से साधुओं का संग करें।

यदि व्यक्तिगत रूप से नहीं कर सकते तो यूट्यूब आदि पर परंपरागत गुरु और साधुओं के प्रवचनों को नियमित रूप से सुनें।

  • कामुक और अमर्यादित मित्रों का त्याग करें।

त्याग नहीं कर सकते तो दूरी बनाएँ रखें। सिर्फ़ काम से काम रखें। ज़रूरत पड़ने पर उसकी सहाय अवश्य करें, परंतु उनके साथ व्यर्थ का समय बिताकर उन्हें आपकी बुद्धि में गंदगी न भरने दें।

  • संयमी, सम्माननीय, गुणवान, धर्मवान व संस्कारी भक्त मित्र बनाएँ

और उनके संग में रहें। और यदि ऐसा कोई मित्र न मिले तो फिर स्वयं

ऐसे बनें और फिर औरों को प्रेरित करके उनको ऐसा बनाएँ। भविष्य में

कोई यह फ़रियाद न करें कि मित्र बनाने के लिए ऐसे लोग तो है ही नहीं।

  • अपनी पत्नी के अतिरिक्त सबमें मातृ बुद्धि बनाएँ।

उन्हें माताजी कहकर ही बुलाएँ। और जरा सी भी काम भावना होने पर तुरंत उनमें माँ दुर्गा, काली, उमा के दर्शन करें और नमन कर लें।

  • अपने विचारों को एक मनोचिकित्सक की तरह ध्यान से समझें। उनका निरीक्षण करें और मन के खेलों को समझें कि, कैसे वो सतत आपको लुभाने का प्रयास करता है? और फिर उसके खेल में उसी को हराएँ।
  • याद रक्खें की ब्रह्मचर्य मात्र नाव है, ध्येय तो भगवद्भाप्ति ही है। अतः ब्रह्मचर्य को अपने जीवन का ध्येय बनाकर न चलें। भगवद्द्माप्ति पर ध्यान लगाओगे तो ब्रह्मचर्य अपने आप सरलता से पालन हो जाएगा।

हनुमान जी ने कभी ब्रह्मचर्य को जीवन का ध्येय नहीं बनाया था। अपितु अपने प्रभु श्रीराम की भक्ति में इतने मग्न हो गए थे कि माया दूर से ही उनको प्रणाम करके चली जाती थी।

ऐसे ही,

हर भगवद्भक्त भगवान मात्र को ही

अपने जीवन का मध्य बनाकर चलता है।

न की ब्रह्मचर्य को।

जिससे साधक को अपने इस महान ध्येय के सामने अपने शरीर की ज़रूरतें तुच्छ लगने लगती है और उसका ब्रह्मचर्य का पालन बड़ी सरलता से हो जाता है।

अतः मॉडर्न समय में जब हम सभी ऐसे वातावरण से घिरे हुए हैं जो प्रतिदिन हमारी बुद्धि में कामुकता भरकर उसे दूषित करती है।

टीवी, मोबाइल, इंटरनेट तो छोड़ो आते जाते रोड और दुकानों पर भी अर्धनग्न स्त्री पुरुषों के चित्र लगे रहते हैं।

ऐसे में अपनी बुद्धि को प्रतिदिन शुद्ध करना अत्यंत ही आवश्यक हो जाता है।

वरना वह दूषित बुद्धि ही बड़ी सरलता से हमारा ब्रह्मचर्य खंडन करवा देती है।

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