ब्रह्मचर्य का पालन करने के लिए संकल्प धारण कैसे करे।

संकल्प धारण (Taking Vow)

अब क्योंकि आपने अपने जीवन के हर कोने से कामुकता की सफ़ाई कर दी है, अब जाकर आप अपना ब्रह्मचर्य का संकल्प ले सकते हैं।

बिना अपने जीवन से कामुकता की सफ़ाई किए संकल्प लेने से निश्चय ही आपका संकल्प टूटता है और बार बार संकल्प टूटने पर आपकी संकल्प शक्ति और आत्मविश्वास क्षीण होता है।

परंतु संकल्प लेने से पहले यह जान लेते हैं कि,

क्या होता है संकल्प?

सरल भाषा में समझें तो ‘किसी भी विषय पर लिए गए दृढ़ निश्चय, प्रण या प्रतिज्ञा को संकल्प कहते है।’

क्यों लें संकल्प?

आपका संकल्प ही किसी कार्य के प्रति आपकी गंभीरता दर्शाता है। बातों बातों में तो हम कुछ भी बोल देते हैं। परंतु जब संकल्प लें तभी मानना चाहिए कि हम किसी कार्य के प्रति सच में गंभीर हैं।

कैसे लें संकल्प?

1. संकल्प हमेशा अपने किसी आदरणीय की साक्षी में लें..

जिनको आप हृदय से पूज्य मानते हो और उनसे कोई बात छुपाते नहीं हो। कोई न हो तो अग्नि, जल, वायु, आकाश, पृथ्वी, गुरु, इष्ट या भगवान आदि के साक्षी में संकल्प ले सकते हैं। हालाँकि तभी जब आप उनसे समर्पित हो और उनकी सर्वव्यापकता पर आपको तनिक भी संदेह न हो।

फिर संकल्प तोड़ना मतलब उनको किए समर्पण का अपमान करना और उनकी आँखों में हमेशा के लिए गिर जाना। इसीलिए …

2. प्राण जाएँ परंतु संकल्प न जाने पाएँ।

जी हाँ। संकल्प कोई मज़ाक़ नहीं होती है। बिना संकल्प के तो कोई यज्ञ कर्म भी शुरू नहीं किया जाता और न ही उसके बिना कोई यज्ञ सफल होता है। समस्त देवों, ऋषियों, ब्राह्मणों, नैष्ठिक ब्रह्मचारियों और पतिव्रता पत्नियों की शक्तियाँ और सिद्धियाँ उनके संकल्प से ही आती है।

संकल्प टूटने पर तुंरत ही उनकी वाणी, उनके श्राप, उनके वरदान, उनका त्रिकाल दर्शन, उनकी सिद्धियाँ, उनके चक्र आदि सभी से शक्तियाँ क्षीण होकर समाप्त हो जाती है। अतः वे हमेशा अपने संकल्प और वचन को प्राणों से भी अधिक जानकार उनका पालन करते थे।

इसीलिए बिना बात की गंभीरता को समझे उसका संकल्प नहीं लेना चाहिए और संकल्प की यह मर्यादा बनी रहे इसीलिए..

3. संकल्प मात्र उसी कार्य का लें जो आपके सीधे नियंत्रण में हो..

न की उसका जो आपके सीधे नियंत्रण में नहीं है। इसीलिए यदि आपको पता है कि अभी तक आपकी इंद्रियाँ आपके वश में नहीं है तो सीधा सीधा ब्रह्मचर्य का संकल्प नहीं लेना चाहिए। यह मूर्खता है।

इसीलिए इन कार्यों का संकल्प जब तक तैयार न हो तब तक न लें,

1. मेरा वीर्य नहीं गिरने दूँगा। क्योंकि शुरुआत में स्वप्न दोष आदि से गिरेगा।

2. मैं कभी किसी लड़की के बारे में ग़लत नहीं सोचूँगा। क्योंकि विचार तो आएँगे, उनका प्राथमिक नियंत्रण आप पर नहीं है।

3. मैं सुबह 3 बजे उठ ही जाऊँगा। क्योंकि यदि अभी भी रात को देरी से भोजन पा रहे हो और जल्दी सो नहीं रहे हो तो सुबह नहीं उठ पाओगे।

तो फिर आख़िर किन कार्यों का संकल्प लें?

  • उनका जो आपके सीधे नियंत्रण में हो,
  • जो आपको पता है की आप कर सकते हो,
  • और जो उन स्थितियों को परोक्ष रूप से नियंत्रित करते हैं, जिनपर आपका सीधा नियंत्रण नहीं है। जैसे कि…

1. मैं आज के बाद कभी घर या रूम में अकेला नहीं रहूँगा। जिस दिन घर पर कोई न हो बाहर आँगन या बालकनी में बैठकर काम करूँगा।

2. मैं आज के बाद कभी बाथरूम में मोबाइल आदि नहीं ले जाऊँगा। और ले जाने के लिए कोई भी बहाना नहीं बनाऊँगा।

3. मैं सूर्यास्त या 7 बजे के बाद कुछ नहीं खाऊँगा। यदि उससे पहले नहीं भोजन पा सका तो भूखा रहूँगा।

4. मैं अधिक से अधिक 9 या 9:30 बजे सो जाऊँगा।

5. मैं सुबह उठते ही तुरंत बिस्तर त्याग कर 20 मिनट व्यायाम करूँगा।

एक के बाद एक इस प्रकार के संकल्प लेने से आप इनका पालन कर पाओगे और इनका सीधा असर आपके ब्रह्मचर्य के पालन पर होगा। जब तक इनका पालन सही से कर रहे हो आपका ब्रह्मचर्य पालन सरलता से हो जाएगा।

परंतु यदि,

संकल्प तोड़ें तो क्या होगा?

1. संकल्प को तोड़ने से आपकी संकल्प शक्ति नाश होगी,

2. जिससे आपका आत्मविश्वास (Confidence) नाश होगा,

3. जिससे अगली बार संकल्प को पूरा करना और कठिन हो जाएगा,

4. और यदि बार बार ऐसे ही संकल्प तोड़ोगे तो अंत में संकल्प शक्ति संपूर्ण क्षीण हो जाएगी और आप के लिए जीवन के अन्य छोटे से छोटे संकल्प भी पूरा करना कठिन हो जाएगा।

संकल्प का पालन करने से क्या होगा?

1. जितनी बार आप अपने संकल्प का पालन करते हो तब तब आपकी संकल्प शक्ति में वृद्धि होती है,

2. जिससे आपके आत्मविश्वास (Confidence) में वृद्धि होती है,

3. जिससे आपके लिए और बड़े संकल्प पूरे करना सहज होने लगता है।

4. और यदि ऐसे ही बार बार संकल्प की पूर्ति करते हुए अखंड संकल्प शक्ति का विकास कर लेते हो तो फिर लोक परलोक में कोई ऐसा ध्येय नहीं रहता जिसकी प्राप्ति आप अपनी संकल्प शक्ति से न कर पाओ।

अतः अपने संकल्पों को हल्के में न लें, और उनके प्रति गंभीर बनें।

क्योंकि आपका हर एक संकल्प आपके अभी लिए हुए और भविष्य में लेने वाले सारे संकल्पों पर असर करता है।

इसीलिए,

धीरे धीरे शुरुआत करें,

छोटे छोटे संकल्प लेना शुरु करें,

उनको प्राण समान मानकर पालन करें,

और अपनी संकल्प शक्ति को बढ़ाते हुए अखंड बनाएँ।

क्योंकि यही आपके जीवन की समस्त सफलताओं का सबसे बड़ा कारक है।

3. सुधार परीक्षण (Tracking progress)

सफ़ाई और संकल्प के पश्चात सबसे आवश्यक कार्य है, सुधार परीक्षण। ख़ास करके अभी जब आप अपने ब्रह्मचर्य की यात्रा की नयी नयी शुरुआत कर रहे हो।

यदि अभी शुरुआत में आप अपने सुधार का परीक्षण नहीं करोगे, तो आपको पता भी नहीं चलेगा की आप कब पुनः उन्हीं आदतों में गिर गए और पुनः अपने ब्रह्मचर्य का नाश कर दिया।

अतः अपने सुधार परीक्षण को प्रतिदिन गंभीरता से करें। अभी प्रश्न यह आता है कि, किसका सुधार परीक्षण करना आवश्यक है? परंतु उससे पहले यह जानते है कि,

किसका परीक्षण व्यर्थ है?

1. कितने दिन से आपने पोर्न नहीं देखा,

2. कितने दिन से आपने हस्तमैथुन नहीं किया,

3. कितने दिन से आपने नशा नहीं किया आदि …

इन सभी का परीक्षण करना व्यर्थ है। उससे या तो आप अपना अहंकार बढ़ा रहे हो, या फिर वो गलती कर जाने का डर बढ़ा रहे हो। और दोनों ही आपके ब्रह्मचर्य पालन की यात्रा के लिए हानिकारक बन जाता है।

अतः

जो नहीं करना है उसका परीक्षण न करें। व्यर्थ है। जो करना है उसका परीक्षण करें। यही कारगर है।

तो करना क्या है?

सबसे पहले तो वो सारी चीज़ें जो आपको सिर्फ़ एकबार करनी है। वो सारी चीज़ें जिसके बारे में हमने सफ़ाई कर्म (Desexualization) में बात की थी उनका परीक्षण करेंगे

एक बार के कार्य परीक्षण (One Time Actions Progress) :

घर में कहीं हैं तो यह 3 चीज़ें निकाल कर जला दें :

  • उत्तेजक (Erotic) फ़ोटोज़ या पोस्टर
  • उत्तेजक मैगज़ीन या न्यूज़ पेपर
  • उत्तेजक पुस्तक या साप्ताहिक

फ़ोन, कंप्यूटर, टीवी, ड्राइव आदि से इन 3 चीज़ों को डिलीट कर दें :

  • उत्तेजक फोटो, वीडियो, पोर्न या गेम्स □ उत्तेजक वेबसाइट के बुकमार्क या हिस्टरी
  • स्नैपचैट, टिकटोक, VPN आदि सभी निरर्थक ऐप्स

हर सोशल मीडिया से 3 प्रकार के लोगों को अनफोलों कर दें :

  • मॉडर्न सेलिब्रिटी, मॉडल, गायक कलाकार आदि
  • मॉडर्न मनोरंजक, इंफ्ल्युएंसर्स, टिकटोकर आदि
  • निरर्थक Meme और मनोरंजन के पेज आदि

सिर्फ़ परिवार, मित्र बंधु और जो आपकी शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या आध्यात्मिक उन्नति कराएँ उन्हें ही फॉलो करें।

यह 3 चीज़ें बंद कर दें :

  • सारे सोशल मीडिया की नोटिफिकेशन (90% नोटिफिकेशन व्यर्थ ही होती है, अतः सिर्फ़ अत्यंत ज़रूरी कॉल और मेसेज ही चालू रखें)
  • आवश्यकता न होने पर इंटरनेट (आपको पता चलेगा कि कितना सारा निरर्थक Distraction इसीसे कम हो जाता है)
  • सोने के 1 घंटे पहले मोबाइल (और सुबह उठकर व्यायाम और साधना पूरी होने तक उसे शुरू न करें)

इन 3 चीज़ों को प्रतिस्थापित (Replace) करें :

  • सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग के स्थान पर पुस्तक की स्क्रॉलिंग (इसके लिए भगवद् गीता आदि कोई अच्छी पुस्तक हमेशा अपनी बैग में रखें)
  • फ़ोन में मॉडर्न म्यूजिक के स्थान पर सत्संग या ज्ञानवर्धक पॉडकास्ट (या फिर भजन, कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन धुन)
  • आपके पर्सनल कंप्यूटर का स्थान बेडरूम से घर के मुख्य रूम में।

अब क्योंकि आपने अपने जीवन से कामुकता की संपूर्ण सफ़ाई कर दी है। आपने अपने ब्रह्मचर्य की 50% यात्रा यहीं पूरी कर ली है। अब बाक़ी की 50% यात्रा आपकी दिनचर्या निर्धारित करेगी।

आप जितना इस दिनचर्या पर दृढ़ रहोगे, ब्रह्मचर्य पालन आपके लिए उतना ही सरल और सहज होता जाएगा।

108 Strong Challenge :

परंतु ये सब करना तो बहुत कठिन है, बिना इतना सब किए क्या सीधा ब्रह्मचर्य का फल नहीं मिल सकता?

देखिए यदि ब्रह्मचर्य कठिन नहीं होता तो इसका कोई महत्व ही नहीं होता। फिर तो कोई भी लल्लू पंजू ब्रह्मचारी बन जाता जो समय पर उठता नहीं है, कुछ भी खा पी कर सूअर की तरह दिन रात पड़ा रहता है और बिना किसी यम नियम के एकदम संयमविहीन जीवन जीता है।

यह संसार का नियम है कि, कठिन कार्य ही अंत में बड़ा फल देतें हैं। लोग UPSC आदि सरकारी परीक्षाएँ पास करने वालो की इतनी वाह वाही क्यों करते है? क्योंकि वह कठिन है पास करना।

और इसलिए अंत में ऐसा मूल्यवान फल देता है, जो सबको चाहिए है पर हर कोई पा नहीं सकता। यदि उसे पाना आसान होता तो किसी को उसकी पड़ी नहीं होती।

वैसे ही भगवान ने सृष्टि के सबसे मूल्यवान फलों की परीक्षा भी उतनी ही कठिन रखी है। जितना मूल्यवान फल, उतनी ही कठोर तपस्या।

बाक़ी इतना करने के पश्चात यदि आप जीवन में कहीं अटक गए हो, तो बस इतना याद रखें की,

आपकी अधिकतर समस्याओं के उपाय सरल है।

मनोस्थिति (Mood) ठीक करनी है तो, व्यायाम (Excercise) करें।

विचारों में स्पष्टता लानी है तो, ध्यान या मंत्रजप (Meditate) करें।

दुनिया को समझना है तो, शास्त्र और उचित ज्ञानवर्धक पुस्तक पढ़ें।

अपने आप को समझना है? साधना करें और अपने विचारों को लिखें।

कुछ भी जल्दी सीखने के लिए, उसे मज़ेदार बनाकर उत्साह से करें।

किसी क्षेत्र में जल्दी आगे बढ़ने के लिए, उसे नित्य करें (Consistently)

लोगों की मदद करनी है तो, पहले अपनी मदद करें।

क्या करें यदि ये सारी चीज़ें हम न कर पाएँ?

देखिए यदि सच में गंभीर हो तो सब कर लोगे। शायद शुरुआत में कुछ बार गिर सकते हो, जो की सहज है। ब्रह्मचर्य के मार्ग पर हम बच्चे के समान है, अभी सिख रहे हैं।

इसलिए शुरुआत में यदि गिर जाओ तो इतनी चिंता मत करो। सोचो की इसबार क्या गलती की, और अगली बार उस गलती का उपाय पहले ही कर दो। ऐसे ही आप कुछ ही समय में इस साधना में निपुण हो जाओगे।

परंतु यदि हमने बताया है उतना करते हो तो ब्रह्मचर्य का पालन होगा ही। अतः आज ही से 100% विधि का पालन करें।

यदि कोई कारण वश 100% नहीं कर पाते तो 9% कीजिए। 90% नहीं तो 80%, और 80% भी नहीं तो 50% ही कर लीजिए।

50% तो हर कोई कर सकता है। उतना नहीं कर सकते, तो फिर आप बस बहाने बना रहे हो। सच में गंभीर नहीं हो ब्रह्मचर्य को लेकर।

कम से कम 50% से शुरू करें, और फिर एक एक नियम हर एकादशी को बढ़ाएँ। 50 से 55% पर आइए, कुछ नियम बढ़ाइए। 55 से 60% पर आइए।

ऐसा करते करते आप समय के साथ 100% पर आ जाओगे।

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