
समास (Samas in Hindi Grammar)
समास की परिभाषा :- दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से नया शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं।
अथवा,
दो या दो से अधिक पद जब अपने बीच की विभक्ति को छोड़कर आपस में मिल जाते हैं, तब इसी मेल को ‘समास‘ कहा जाता हैं।
जैसे – आजीवन, बेदाग, प्रतिवर्ष, घड़ी-घड़ी, प्रतिदिन आदि।
समास के प्रकार या भेद (Samas Ke Parkar Ya Bhed in Hindi)
हिन्दी व्याकरण में समास के छह भेद होते हैं जो की निम्नलिखित हैं –
1 . अव्ययीभाव समास
2 . तत्पुरुष समास
3 . कर्मधारय समास
4 . द्वन्द समास
5 . द्विगु समास
6 . बहुब्रीहि समास
1 . अव्ययीभाव समास
परिभाषा – जिस समास में पहला पद अव्यय होता है वह अव्ययीभाव समास कहा जाता है। यहाँ प्रथम पद प्रधान होने से समस्त पद (सामसिक पद) भी अव्ययी होता हैं अर्थात लिंग, वचन एवं कारक की दृस्टि से यह नहीं बदलता हैं।
✅ अव्ययीभाव समास के समस्त पदों का विग्रह करते समय प्रायः निम्नलिखित तरीके काम में लाये जाते हैं –
(क.) जिस पद में पहला पद ‘आ‘ उपसर्ग से बना हो तो उसके विग्रह में पद के अंत में ‘तक‘शब्द लिखा जाता है।
जैसे –
आमरण – मरण तक
आजन्म – जन्म तक (जन्म से)
आकण्ठ – कण्ठ तक
आजीवन – जीवन रहने तक (जीवन भर)
(ख.) जिस पद में पहला पद बे, नि, ना, निर, निस उपसर्ग से बना हो तो उसके विग्रह के अंत में प्रायः ‘रहित’ शब्द जोड़ते हैं अथवा प्रारम्भ में ‘बिना’ शब्द लिख दिया जाता हैं।
जैसे –
बेवजह – बिना वजह के (वजह से रहित)
बेदाग – बिना दाग के (दाग से रहित)
नासमझ – बिना समझ का (समझ से रहित)
नापसंद – बिना पसंद का (पसंद से रहित)
निडर – बिना डर का (डर से रहित)
(ग.) अव्यय शब्द ‘यथा‘ से बने शब्दों का विग्रह पद के अंत में ‘के अनुसार’ शब्द लिखकर अथवा प्रारम्भ में जैसा/जैसी शब्द लिखकर करते हैं।
जैसे –
यथाशक्ति – शक्ति के अनुसार
यथास्थिति – जैसी स्थिति है (स्थिति के अनुसार)
यथोचित – जैसा उचित है
यथाक्रम – जैसा क्रम है (क्रम के अनुसार)
यथार्थ – जैसा अर्थ है वैसा (अर्थ के अनुसार)
यथागति – गति के अनुसार
(घ.) ‘प्रति’ उपसर्ग से बने शब्दों का विग्रह करते समय प्रायः मुख्य शब्द को दो बार लिख देते हैं अथवा उस शब्द से पहले ‘हर’ शब्द जोड़ देते हैं।
जैसे –
प्रतिवर्ष – हर वर्ष (वर्ष-वर्ष)
प्रतिक्षण – हर क्षण (क्षण-क्षण)
प्रतिपल – हर पल (पल-पल)
प्रतिदिन – हर दिन (दिन-दिन)
प्रत्येक – हर एक (एक-एक)
2 . तत्पुरुष समास
परिभाषा – जिस समास का पहला पद गौण व दूसरा पद प्रधान होता है उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें दूसरा पद विशेष्य होता है तथा प्रथम पद उसकी विशेषता प्रकट करता है।
कर्त्ता व सम्बोधन कारक की विभक्ति चिन्ह को छोड़कर शेष 6 विभक्तियों का सामसिक प्रक्रिया में लोप हो जाता है तथा विग्रह अवस्था में कारक चिन्ह उपस्थित होता हैं।
तत्पुरुष समास के उदाहरण –
कर्म तत्पुरुष – ‘को’
मुँहतोड़ – मुँह को तोड़ने वाला
नरभक्षी – नरों को भक्षित करने वाला
स्वर्गप्राप्त – स्वर्ग को प्राप्त
शरणागत – शरण को आया हुआ
करण तत्पुरुष – ‘से’, ‘द्वारा’
शोकाकुल – शोक से आकुल
हस्तलिखित – हस्त द्वारा लिखित
रेलयात्रा – रेल द्वारा यात्रा
तुलसीकृत – तुलसी द्वारा कृत
सम्प्रदान तत्पुरुष – ‘के लिए’
गोशाला – गौ के लिए शाला
कारागृह – कारा के लिए गृह
विधानसभा – विधान के लिए सभा
देवालय – देव के लिए आलय
अपादान तत्पुरुष – ‘से’ पृथक होने के अर्थ में
जन्मांध – जन्म से अँधा
नेत्रहीन – नेत्र से हीन
राजद्रोह – राजा से द्रोह
पदमुक्त – पद से मुक्त
सम्बन्ध तत्पुरुष – ‘का, के, की’
राजसभा – राजा की सभा
सेनापति – सेना का पति
कन्यादान – कन्या का दान
आमचूर – आम का चूर्ण
अधिकरण तत्पुरुष – ‘में, पर’
कविराज – कवियों का राजा
आत्मकेंद्रित – आत्मा पर केंद्रित
काव्यनिपुण – काव्य में निपुण
वनवास – वनों में वास
ऊपर दिए गए “कर्म तत्पुरुष” से लेकर “अधिकरण तत्पुरुष” तक दिए गए सभी उदाहरण मुख्य रूप से तत्पुरष समास के ही उदाहरण हैं।
3 . कर्मधारय समास
परिभाषा – कर्मधारय समास का दूसरा पद प्रधान होता है। विग्रह करने पर रूपी शब्द प्रयुक्त होता है। इसमें पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है अथवा पहला पद उपमेय और दूसरा पद उपमान होता है।
कर्मधारय समास के उदाहरण –
नीलाम्बर – नीला है जो अम्बर
महर्षि – महान है जो ऋषि
पुरुषोत्तम – पुरुष है जो उत्तम
महाजन – महान है जो जन
चरणकमल – चरण है जो कमल
महापुरुष – महान है जो पुरुष
महात्मा – महान है जो आत्मा
विद्याधन – विद्या रूपी धन
पूर्णांक – पूर्ण है जो अंक
लालटोपी – लाल है जो टोपी
4 . द्वन्द समास
परिभाषा – जिन समास के दोनों पद प्रधान होते हैं वह द्वन्द समास कहा जाता हैं। इस समास में ‘या’ व ‘और’ के द्वारा दो या दो से अधिक शब्दों को जोड़ा जाता हैं।
✅ दोनों पद प्रायः एक-दूसरे के विलोम होते हैं, सदैव नहीं। कभी-कभी समूहवाची शब्द होने पर अंत में आदि लगता है।
द्वन्द समास के उदाहरण –
राधा-कृष्ण – राधा और कृष्ण
दाल-रोटी – दाल और रोटी
हरिहर – हरि और हर
भूल-चूक – भूल चूक आदि
हाथीघोड़ा – हाथी और घोड़ा
धन-दौलत – धन दौलत आदि
माता-पिता – माता और पिता
दूध-रोटी – दूध और रोटी
फल-फूल – फल फूल आदि
भाई-बहन – भाई और बहन
5 . द्विगु समास
परिभाषा – इसका पहला पद संख्यावाचक (गणना बोधक) होता है व दूसरा पद प्रधान होता है एवं समूहवाची होता है, इस समास में समूह का बोध होता हैं।
द्विगु समास के उदाहरण –
पंचवटी – पाँच वृक्षों का समूह
त्रिवेणी – तीन वेणियों (धाराओं) का समूह
त्रिलोक – तीनों लोकों का समाहार
दशाब्दी – दश वर्षों का समूह
चवन्नी – चार आनों का समाहार
सप्ताह – सात दिनों का समूह
त्रिभुवन – तीन भुवनों का समूह
नवग्रह – नव (नौ) ग्रहों का समूह
सप्तकोण – सात कोणों का समाहार
दोपहर – दूसरा पहर (दो पहरों का समाहार)
6 . बहुब्रीहि समास
परिभाषा – इस समास में दोनों ही पद गौण होते हैं, उनमें कोई भी पद प्रधान नहीं होता। परन्तु दोनों पदों के अर्थ से तीसरा पद प्रधान होता है।
बहुब्रीहि समास के उदाहरण –
पीताम्बर – पीत हैं अम्बर जिसका – विष्णु
लम्बोदर – लम्बे उदर वाला – गणेश
दिगम्बर – दिशा ही है अम्बर जिसका – शिव
वीणापाणि – वीणा है हाथ में जिसके – सरस्वती
पदमासन – पदम है आसन जिसका – ब्रह्मा
रतिकांत – रति का है जो कांत (पति) – कामदेव
मुरलीधर – मुरली धारण करने वाला है जो – श्रीकृष्ण
नीलकंठ – नीले कंठ वाला – शिव
अनंग – बिना अंग का है जो – कामदेव
हलधर – वह जो हल का धारण करता है – बलराम / किसान आदि।
हिंदी व्याकरण – Hindi Grammar
- हिंदी व्याकरण | वर्ण | स्वर वर्ण | व्यंजन वर्ण | शब्द | संधि | समास | उपसर्ग | प्रत्यय | संज्ञा | सर्वनाम | विशेषण | क्रिया विशेषण | वाक्य | लिंग | क्रिया | अव्यय | पुरुष | कारक | वचन | काल | विराम चिन्ह।
- अनेकार्थी शब्द | विलोम शब्द | पर्यायवाची शब्द | वाच्य | काव्य | तत्सम एवं तद्भव शब्द | अपठित पद्यांश | अपठित गद्यांश | पल्लवन | पद परिचय | शब्द शक्ति | पदबंध | रस | छंद | अलंकार।